बाज़ारी प्रोपेगंडों से दूर इंसानी ह्रदय में स्पंदन करतीं मानवीय संवेदनाओं में प्रेम की तलाश करतीं सीमा आरिफकी कवितायेँ ..

इश्क़ वाला दिन

इस मुहब्बत के दिन
मैंने यह कविता
तुम्हारे वास्ते भीड़ से खचाखच
भरी बस में लिखी थी
लोगो के बीच फंसी उन हज़ारों
शक्लों ने घेर रखा था मेरे
इस सियाह प्रेम को
चारों दिशाओं से
जिनके बीच प्रेम से
सराबोर यह शब्द
साँस तक लेने में असमर्थ
से हो गए थे
प्रेम की इस चिट्टी का अविष्कार हुआ था
खिड़की मस्जिद की
नुकीली छतों की महराबों पर
जहाँ तुम मुझे अपने पिछली
सर्दी के कपड़े को धूप दिखाते
धुंधले से नज़र आ रहे हो
प्रेम के इस विशेष दिन पर।।

देखा जो उसने

छूकर मुझे
ख़ुश्बू जो छोड़ गया
वो अपनी सिरहाने मेरे
संदल,चंदन,लोबान फ़ीके सब
प्रेम के रस में डूबे उस ख़ुमार
के आगे भीनी सी एक
मुलाक़ात ही तो थी
वो…….उसका एक नज़र भर देखना।

शर्तें लागू

google se saabhaar

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यह शर्तें,इश्तिहार अख़बारों में
रिश्ते,शादी की डील कराने
वाले ऑनलाइन बिचोलिए
की मारम मार कम्प्यूटर
के दरवाज़ों में
सुंदर,कमसिन,सुशील
कन्या की सब वरों को
तलाश यहाँ
कमउम्र लड़की पाने
की आस जहाँ
गौरी,चिट्टी,सुडौल बदन
पाना है इनका ख़्वाब
कामकाजी,पढ़ी लिखी
होना मेनडेडरी है भाईसाब
इन सब बातों पर यदि आप
खरी उतरती है तो
ख़ुश हो जाएँ मोहतरमा
काली,मोटी,उम्रदराज़,माने
अवरेज लड़कियों
के लिए….शर्तें लागू है इस पार

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