हमरंग” हमेशा ही प्रस्फुटित होते ऐसे रचनाकारों को जगह देते रहने को तत्पर रहा है जो सार्थक लेखन की दिशा में अपनी कलम चलाते दिख रहे हैं | ‘दीपक निषादउन्हीं उभरते रचनाकारों की कड़ी में अगला नाम है  | वैचारिक रूप से कम उम्र में ही सामाजिक, राजनैतिक परिदृश्यात्मक, प्रौढ़ दृष्टिकोण  का समावेश इनकी रचनाओं की पहचान है | इनकी रचनाओं की यही विशेषता निषाद में एक संभावनाशील लेखक होने की ओर इशारा करती है | हमरंग पर प्रकाशित होने वाली यह उनकी भले ही पहली कविता है किन्तु वृहतर अभिव्यक्ति के साथ इनकी अन्य रचनाएं यहाँ स्थान पाती रहेंगी ऐसी अपेक्षा के साथ …..| संपादक 

इस्क्रा 

दीपक निषाद

बुझा दो इस्क्रा,
तोड़ दो कलमें,
जला दो किताबें,
काट दो जीभ,
मरोड़ दो शब्द,
भाप बना दो भावों को,
हत्या कर दो प्रेम की,
दूर कर दो इंसान को इंसानियत से,
खत्म कर दो इंकलाब को इतिहास से,
बना दो देशद्रोही तुम्हारे विरुद्ध बोलने वालों को,
मिलालो अपने साम्राज्य में वियतनाम, क्यूवा, कॉगो
भर लो पूँजी अपने हृदय में,
लील जाओ सावन, झूले, इंद्रधनुष, रूप-रंग-रस-गंध
पर सुनो रे
मालिको
वीरान हुऐ आँगन में चढ़ते गोल चाँद की
अंतहीन चुप्पी के जैसे
तुम्हारे द्वारा बनाई इस व्यवस्था में
अपने बाप के लिए नमक से रोटी ले जाता राजू,
धधकती धूप में भूखे पेट रक्त से खेत सींचता परमीत
अधनंगे बदन से कपड़े बुनता इमरान
तुम्हारे महलों के दरवाजों पर अपनी रात काली करता बहादुर
दिये में अक्षर टटोलता किशन
पानी की लाइन में खड़ी हुई पिंकी
कूड़े के ढेर से खिलौनें वीनता चिंटू
बाँस की तरह पतले पैरों से रिक्शा खिंचता होरी
तुम्हारी बारातों में लाइट उठाता पप्पू
कंधे पे पोटली लिए अपना गाँव छोड़ता टिल्लू
नोजवानों पर लाठी उछालता इंस्पेक्टर
किसी कोठे में सज के बैठी चाँदनी
अपने गले में रस्सी डाले खड़ा सोनू
सरहद पर बैठा तेजू
नदी किनारे छोडते माँझी
जब
किसी शून्यकाल के अनजाने में अपने-आप प्रश्न कर बेठेंगें
“ऐसा क्यों है…?”
किसी रोज जब उन्हें इसका सटीक उत्तर मिलेगा
तो धरी रह जाएंगी तुम्हारी सारी उत्पत्तियाँ
तुम्हारे ये स्वर्ग
तुम्हारे ये नरक
तुम्हारे ये पुनर्जन्म
तुम्हारे ये ईश्वर
तुम्हारे ये धर्म
तुम्हारे ये राम-बाबर
तुम्हारी ये झूटी संसद
तुम्हारी ये सरहदें
तुम्हारे ये परमाणु बम
और
निकल पड़ेंगे इनके जत्थे उस इस्क्रा को
ज्वाला बनाने ।

  • author's avatar

    By: दीपक निषाद

    छात्र दिल्ली विश्वविद्यालय, दिल्ली

  • author's avatar

  • author's avatar

    See all this author’s posts

Leave a Reply

Your email address will not be published.