नए लेखकों को बेहतर मंच प्रदान करना भी हमरंग के उद्देश्यों में शामिल है | इसी पहल के साथ अब तक हमरंग एक नहीं कई नव लेखकों की रचनाएं प्रकाशित कर उन्हें प्रोत्साहित कर चुका है और उनकी कलम निरंतर चल रही है  | आज इसी कड़ी में तरसेम कौरका एक और नाम शामिल हो रहा है| आशा है आप भी इनकी कविता पर अपनी महत्वपूर्ण टिपण्णी देकर प्रोत्साहित करेंगे संपादक  

एक बिटिया की मनोव्यथा…

<img class="size-medium wp-image-1833" src="http://www comparateur de viagra.humrang.com/wp-content/uploads/2016/09/Tarsem-Kaur-254×300.jpg” alt=”तरसेम कौर ” width=”254″ height=”300″ />

तरसेम कौर

हे ईश्‍वर
ना देना मुझे इतनी सहनशीलता
हूँ मैं बिटिया
एक प्रताड़ित माँ की
देखा है मैंने
हर पल उन सूनी आखों में
न ख़त्म होने वाला इंतज़ार
मन नहीं होता
पुकारने का उस औरत को
एक असहाय, एक अबला
हार जाती हूँ
उसी के रुढ़िवादी या कहूँ
दकियानूसी अडिग विचारों
के समक्ष मैं
जिसने आधा जीवन किया
समर्पित इक हैवान के नाम
है आज भी
सिन्दूर उसी के नाम का
करती व्रत लम्बी उम्र का
मानती उसे परमेश्वर अपना
ना देना मुझे इतनी सहनशीलता
हे ईश्‍वर. !!!!

 

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