मानव जीवन की संवेदनाओं एवं कोमल भावों को रचनात्मक अभिव्यक्ति देती पूरे आत्मविश्वास से भरी नीलम स्वर्णकारकी कुछ कविताएँ ……| – संपादक 

“चल रे मन दूर कहीं.” 

नीलम स्वर्णकार

नीलम स्वर्णकार

कभी कभी जब थक जाती हूँ
चली जाती है मेरी आत्मा यहां वहां
अभी कुछ दिन पहले ही
मैं थी उस बेपरवाह इंगलिश मैन के जिस्म में
जो दूर कहीं एकांत में
झोंपडी के सामने बहती हडसन नदी के किनारे
मछली पकड रहा था
सिर पे हैट लगाए सिगार फूंक रहा था
शाम होते होते उसके जिस्म में विचरती मेरी आत्मा ने
खत्म कर ली पुरानी अंगरेजी कविताओं की एक किताब
कुछ सूखी लकडियां बटोर लीं
आग जलाने के लिए
जब खाना बनाने के लिए
इंगलिश मैन ने अपने बर्तन नदी में धोने शुरू किए
तो याद आई मुझे अपनी गृह्स्थी
और लौट आयी मैं
उस आदमी का पुराना कोट खूंटी पर टांगकर….

चाहती हूँ लफ्ज़ दर लफ्ज़ पढा जाना खुद का

मौन टीसता है भीतर ही भीतर
अकुलाहट करवटें बदलती है
प्रेम तिरस्कृत किए जाने का भय
छुपा लेता है स्याह रात की तरह मासूम निवेदन

तुमने क्यों नहीं पढा
मौन की वर्णमाला का हर एक अक्षर
शब्द धो देते हैं
मूल भावों को
एसे या वैसे आखिर किस तरह
कौनसी सीढी ..किस दिशा में रखने पर
तुम्हारे ह्रदय तक पंहुचेगी

प्रश्नाकुल पुतलियाँ पलकों से आग्रह करती हैं
ढक लिए जाने का
कि अंश भर भी जाना न जा सके
प्रश्नों की किताब का दुखता चेहरा
हर एक हर्फ में दबी पीडा..

जबकि मन ही मन मैं चाहती हूं
लफ्ज़ दर लफ्ज़ पढा जाना खुद का
पर सिर्फ उन आँखों के सुपुर्द करना चाहती हूँ
मैं अपना सम्पूर्ण अस्तित्व
जो अश्रु मिश्रित स्याही से लिखी एक एक पीडा को
अपनी पलकों से सहला सके

संभावनाओं की कल्पना भर भी
बंजर मन हरा करती है
खुले जख्मों पर मरहम की आस जगाती है
पर स्वयं को स्मरण कराते रहना होगा
कि उम्र भर की जाने वाली
कुछ सच्ची प्रार्थनाएं भी
सदैव अनसुनी रह जाती हैं…!!

काश ! का भी एक दिन होता है”

तुम जब जब उडेलते हो
मासूम, निष्कपट प्रेम मेरे ऊपर
विश्वास करो
मैं भी
स्वंय को रिक्त कर लेती हूं
प्रेम की आखिरी बूंद तक भरने के लिए

बहा देती हूँ पिछला सारा
जमा हुआ अवसाद
और पूरा का पूरा डुबो लेती हूं
अपना अंतर्मन

प्रेम में गोते लगाते
मैं अपने धैर्य पर चकित होती हूँ

मैं जब जब कहती थी काश! …
हाँ जानती थी

काश! का भी एक दिन होता है
वो आता है
और समुद्री लहरों की तरह
अपने साथ पिछला सब ले जाता है

और छोड जाता है
साफ चमकता रेतीला किनारा
जिस पर हम तुम
अपनी उंगलियों से बडा सा दिल बनाकर
लिखें आय लव यू

और उसी उसी घेरे में बैठ खींचें
कुछ सैल्फी
रोमांटिक पोज बनाते हुए

प्रेम
सब कुछ बदल देने की ताकत रखता है
प्रेम कभी मरता नहीं
बंजर से बंजर हालात में भी
उग आता है

हाँ,
धैर्य का स्वाद
बटरस्काच आइसक्रीम जैसा होता है

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