३१ जुलाई २०१६ को सुर-सम्राट मोहम्मद रफी की पुण्यतिथि पर पटना में आयोजित कार्यक्रम से अनीश अंकुर‘ ……

तू हिंदू बनेगा न मुसलमान बनेगा, इंसान की औलाद है इंसान बनेगा 

दिनेश कुमार शर्मा

31 जुलाई वैसे तो पूरे देश में प्रेमंचद जयंती के रूप में मनाया जाता है। इस तथ्य से थोड़े कम लोग वाकिफ हैं कि ये दिन सुर-सम्राट मोहम्मद रफी की पुण्यतिथि भी है। पटना में हुए प्रेमंचद संबंधी ढ़ेरों आयोजन
हुए लेकिन मोहम्मद रफी के श्रद्धांजलि स्वरूप आयोजन किसी संस्था द्वारा नहीं बल्कि पेशे से न्यायविद् रहे दिनेश कुमार शर्मा की पहलकदमी पर आयोजित किया गया। अवकाश प्राप्त न्यायाधीष दिनेश कुमार
शर्मा खुद मोहम्मद रफी के चुनिंदा गीतों का गायन करते हैं।
वे पटना में पिछले तीन वर्षों से लगातार आई.एम.ए हाॅल में मोहम्मद रफी को याद करते रहे हैं। वैसे ये सिलसिला पिछले 23 वर्षों, 1992 से, चला आ रहा है। जिला व सत्र न्यायाधीष के रूप में अवकाश प्राप्त
करने वाले दिनेश कुमार शर्मा का जहां कहीं भी तबादला होता वहाँ स्थानीय लोगों की सहायता से मोहम्मद रफी स्मृति आयोजन किया करते। हिलसा, बिहारशरीफ, बेतिया गया, आरा , चास, बोकारो, कटिहार,
अररिया, समस्तीपुर, दरभंगा, मधुबनी, गोपालगंज एवं वैशाली इन सभी शहरों में दिनेश कुमार शर्मा ने मोहम्मद रफी के गानों केा गाते हुए उन्हें याद अर्पित करते रहे हैं।
इस बार के आयोजन में दिनेश कुमार शर्मा मोहम्मद रफी के विभिन्न मशहूर शायरों साहिर सुधियानवी, मजरूह सुल्तान, शकील बदायुं सहित कई अन्य शायरों व रचनाकारों केा बेहद तन्मयता से गाया ।
राग ‘यमन कल्याण’ में गाया उनका मशहूर गीत

तेरा हुस्न रहे, मेरा इष्क रहे
ये सुबहो-शाम रहे न रहे
चले प्यार का नाम जमाने में
किसी और का नाम रहे न रहे

हो या फिर कुछ इसी भावभूमि पर राग ‘पहाड़ी’ में ये गीत

काषी से कुछ गरज थी न काबे से वास्ता
हम ढूंढने चले थे मोहब्बत का रास्ता

मोहम्मद रफी ने हर रंग व मिजाज के गीत गाए। हुस्नो-इष्क, पर गाया गया उनका मशहूर गीत

हमको तुम्हारे इष्क ने क्या-क्या बना दिया
जब कुछ न बन सके तो तमाशा बना दिया

गीतों केा गाने के दरम्यान दिनेश कुमार गीतों का संदर्भ या उससे जुड़ी केाई दिलचस्प कहानी भी बताते चलते जैसे राग ‘मालकौंस’ में गाया ‘मन तड़पत हरि दर्शन को आज, प्यासी अॅंखिया…’ सुनाने के पश्चात उन्होंने बताया ‘‘ नेपाल में एक सज्जन इस गीत से इस कदर प्रभावित हुए कि वे मुबंई पहुंचे गायक से मिलने। जब उस हिंदू भक्त केा ये पता चला कि ये गीत एक मुसलमान ने गाया है तो उसे सहसा विष्वास न हुआ। तब मोहम्मद रफी ने इस तथ्य से अवगत कराया कि सिर्फ मैं ही नहीं बल्कि इस गीत के रचयिता शकील बदायुं और संगीतकार नौशाद भी मुसलमान थे। वो बुजर्ग स्तब्ध रह गया’’
आज सत्ता की सरपस्ती में सांप्रदायिक संगठनों द्वारा द्वारा जिस कदर पूरे देश में हिंदू-मुस्लिम तनाव व धु्रवीकरण किया जा रहा है वैसे समय में ये गीत मोहम्मद रफी के ये गीत सामाजिक सद्भाव व कौमी एकता
के सूत्रों केा मजबूत बनाने का काम करता है। दिनेश कुमार शर्मा उनके गीत ही नहीं गाते बल्कि मोहम्मद रफी के बहाने गंगा-जमुनी तहजीब के प्रति भी अपनी प्रतिबद्धता भी व्यक्ति करते हैं।
‘बच्चों’ के लिए साहिर सुधियानवी रचित राग ‘भैरवी’ में ये गीत गीत गाया। इस गीत को दर्शकों ने काफी पसंद किया।

तू हिंदू बनेगा न मुसलमान बनेगा,
तू इंसान की औलाद है इंसान बनेगा
तू बदले हुए वक्त की पहचान बनेगा

राग ‘खमाज’ में गाया गया ये गीत
कभी तुझ पे कभी हालात पे रोना आया
बात निकली तो हर एक बात पर रोना आया
राग ‘भैरवी’ में गाया गया प्रसिद्ध देशभक्ति गीत
कर चले हम फिदा जानो तन साथियो
अब तुम्होर हवाले वतन साथियो

या फिर फकीराना भाव केा जगाता ये गीत

हे राम तेरा नाम एक हुआ न केाई
ये जग आनी-जानी छाया
झूठी काया, झूठी माया
फिर काहे केा सारी उमरिया
बाॅंध के गठरी ढ़ोई
राजा रंक सभी का अंत
एक समान होई

गायक दिनेश कुमार शर्मा ने कुल 20 गीतों को गाया। श्रोतागण भी देर तक बैठे गीतों केा सुनते हुए आनंदविभोर हो सर-संचालन करते रहे।

दिनेश कुमार शर्मा का न्यायविद् होने के साथ-साथ कवि भी हैं। 2003 में उनका काव्य संग्रह ‘ बन जाउं आकाश ’ प्रकाशित हो चुका है। संप्रति वे चार पुस्तकों पर काम कर रहे हैं। एक कानून, दो कविता
संग्रह एवं एक संगीत की पुस्तक शीघ्र प्रकाश्य है।

संगीत व मोहम्मद रफी से दिनेश कुमार शर्मा का लगाव इन शब्दों में अभिव्यक्त होता है ‘‘ बाजारवाद से उपर उठकर मोहम्मद रफी ने कला की साधना की। पैसे केा कभी अहमियत न दी। संगीत उनके लिए
इबादत के समान था’’

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