23 वर्षीय भगत सिंह आज तक युवाओं के प्रेरणा श्रोत हैं ….. यह अलग बात है कि कम ही युवा पीढ़ी भगत सिंह को महज़ एक व्यक्ति के रूप में ही नहीं उन्हें उनके सम्पूर्ण विचार के साथ जानती पहचानती है, और यह बात कहने से नहीं बल्कि युवाओं की क्रियाप्रतिक्रिया या उनके द्वारा सृजित कला साहित्य में यकीनन दृषिट होती है …… पुलकित फिलिप ऐसे ही युवा साथी हैं जिनकी रचनाओं से गुजरते हुए अक्सर ही भगत सिंह का स्मरण हो आता है …| – संपादक 

पिंजर पर टंगी त्वचा pulkit

झुलस झुलस कर सूखता गात
स्याह और सुर्ख है
आज दहक रहा है सूरज
लाल-लाल गोला

एक बहुराष्ट्रीय शक्ति का
प्रतिनिधि है यह ‘मॉल’
बकौल हम-
उडाता मखौल
तमाम (बल्कि अनगिन)
स्याह, सुर्ख गातों का

इस प्रासाद के ठीक सामने
अट्टहास कर रहे हैं दानव :
खाकी वर्दी
साथ में है ‘महाबली’
तहस-नहस करता
सूखते गातों की जीविका
दिखा-दिखा
यद्यपि
दानवों के दांत नुकीले हैं
फिर भी
मचल ही उठता है एक गात
तोड़ने उन्हें
फोड़ने उन्हें

क्षण-प्रतिक्षण
और सुर्ख होता जाता है
दानवों की मार से

एक सिहरन सी उठती है
और-और गातों में
ज्यादा सुर्ख गात की मर्मभेदी चीत्कार से
उसके इर्द-गिर्द एक घेरा सा बनता है
स्याह, सुर्ख गातों का

घेरा- व्यथित
घेरा- प्रधूसित
घेरा- शून्य (अब नहीं)
घेरा- समेटता ऊर्जा

तभी

‘महाबली’ रुकता है
खाकी दानव बेतहाशा भागते हैं
खादी दानव के पास
जो फोटो खिंचा रहा होगा
अमरीकी विदेश मंत्री के साथ !

पेंटिंग अयान मदार

पेंटिंग अयान मदार

प्यारी प्यारी सीपियाँ 

निर्मल, स्वच्छ, साफ़-से जल वाले
कल्पना के असीम सागर
और
कुछ-कुछ रेतीली और भुरभुरी से मिटटी वाली
यथार्थ की ठोस ज़मीन का
जहाँ मिलन होता है
जहाँ मिटटी गीली हो जाती है
जहाँ पानी मिटटीमय हो जाता है
जहाँ पड़ी रहती हैं कई सारी प्यारी प्यारी सीपियाँ
वहीँ से एक सुन्दर सी सीपी
अक्सर उठाई जाती है
जिसे सब कविता कहकर पुकारते हैं !

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