मानव जीवन के चिंतन से गुज़रती संवेदनशील कविता बुनने का सार्थक प्रयास शबानाकी कलम से ……..

प्यास….  

शबाना

शबाना

पेन्सिल मिली, पैन मिला।
एक कागज़ कहीं से ढूंढ लिया
लिखने को मन विचलित हुआ
पांच-दस मिनट सोचने में गँवा दिया।
प्रेम पत्र लिखूँ या कि पानी पत्र ?
पानी की हर तरफ मारा-मारी है,
आज मेरे घर में, कल तेरे घर की बारी है।
बूँद-बूँद के लिए तरसेगा हर इंसान।
कहाँ शुरू हुई और कहाँ खतम।
क्या लिखने बैठी थी, और क्या लिख दिया
सोच रही थी कि प्रेम पत्र लिखूँ।
पर प्यास ने मुझे पानी याद दिला दिया।

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    By: शबाना

    रंगकर्म से जुडाव, कभी कभी कविता लेखन

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