के० पी० सिंह मेमोरियल चेरिटेबल ट्रस्ट द्वारा आयोजित ‘मलखान सिंह सिसौदिया कविता पुरूस्कार’ 2016 “प्रदीप मिश्र” को दिए जाने पर उन्हें हमरंग परिवार की बधाई के साथ……… आज , वक्ती हालातों से जूझते हुए बेहतर कल की उम्मीद जगातीं प्रदीप मिश्र की दो कविताएँ … 

बुरे दिनों के कलैण्डरों में  

जिस तरह से

प्रदीप मिश्र

मृत्यु के गर्भ में होता है जीवन
नास्तिक के हृदय में रहती है आस्था
नमक में होती है मिठास
भोजन में होती है भूख
नफरत में होता है प्यार
रेगिस्तान में होती हैं नदियाँ
हिमालय में होता है सागर
उसी तरह से
अच्छे दिनों की तारीख़ें भी होतीं हैं
बुरे दिनों के कलैण्डरों में।

उम्मीद  

आज फिर टरका दिया सेठ ने
पिछले दो महीने से करा रहा है बेगार
उसे उम्मीद है
पगार की
हर तारीख़ पर
पड़ जाती अगली तारीख़
जज-वकील और प्रतिवादी
सबके सब मिले हुए हैं
उसे उम्मीद है
जीत जाएगा मुक़दमा
तीन सालों से सूखा पड़ रहा है
फिर भी किसानों को उम्मीद है
बरसात होगी
चुका देंगे कर्ज़
आदमियों से ज्यादा लाठियाँ हैं
मुद्दों से ज्यादा घोटाले
जीवन से ज्यादा मृत्यु के उद्घोष
फिर भी वोट डाल रहा है वह
उसे उम्मीद है
आयेंगे अच्छे दिन भी
उम्मीद की इस परम्परा को
हमारे समय की शुभकामनाऐँ
उनको सबसे ज़्यादा
जो उम्मीद की इस बुझती हुई लौ को
अपने हथेलियों में सहेजे हुए हैं।

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    By: प्रदीप मिश्र

    जन्म – १ मार्च १९७०, गोरखपुर, उ. प्र. ।
    साहित्यिक पत्रिका भोर सृजन संवाद का अरूण आदित्य के साथ संपादन।
    कविता संग्रह “फिर कभी” “उम्मीद” वैज्ञानिक उपन्यास “अन्तरिक्ष नगर” तथा बाल उपन्यास “मुट्ठी में किस्मत” प्रकाशित।
    साहित्यिक पत्रिकाओं, सामाचारपत्रों, आकाशवाणी, ज्ञानवाणी और दूरदर्शन से रचनाओं का प्रकाशन एवं प्रसारण । म.प्र साहित्य अकादमी का जहूर बक्स पुरस्कार, श्यामव्यास सम्मान, हिन्दी गरिमा सम्मान , अखबारों में पत्रकारिता ।
    सम्प्रति- परमाणु ऊर्जा विभाग के राजा रामान्ना प्रगत प्रौद्योगिकी केन्द्र, इन्दौर में वैज्ञानिक अधिकारी के पद पर कार्यरत।
    संपर्क – प्रदीप मिश्र, दिव्याँश ७२ए, सुदर्शन नगर, अन्नपूर्णा रोड, डाक : सुदामानगर, इन्दौर – ४५२००९, म.प्र.।
    मो.न. : +९१९४२५३१४१२६, ईमेल – [email protected]

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