किसी भी राष्ट्र की स्थाई विकास यात्रा में वहाँ के भाषाई योगदान को नकारा नहीं जा सकता बल्कि कहा जाय कि भाषा ही राष्ट्रीय विकास की पहली सीढी है | लेकिन इधर भारतीय भाषाओं के विकास को लेकर हमारी सरकारें इतनी चिंतातुर नहीं लगतीं | हिंदी के लिए बड़े बड़े आयोजन तो होते हैं लेकिन भारतीय भू भाग में भी हिंदी जीविकोपार्जन की भाषा नहीं बन सकी | भारतीय विविधिता की पहचान, कई प्रादेशिक भाषाओं के लुप्त और अन्य क्षेत्रीय भाषाए हासिये पर हैं …. ऐसे में “भाषाई विकास की भारतीय अवधारणा” विषय पर साहित्यकार ‘प्रेमपाल शर्मा’ से बात की,  हमरंग के सहयोगी साथी ‘नित्यानंद गायेन’  ने | संसाधन के अभाव पर काम करने का जूनून भारी पडा और यह बात-चीत मोबाईल से रिकॉर्ड की गई …. कैमरे के त्तौर पर मोबाईल को ऑपरेट करने को एक व्यक्ति के आभाव में, इस विधा से बिलकुल अनजान एक वुजुर्ग व्यक्ति के सहयोग से यह साक्षात्कार रिकॉर्ड हुआ तब निश्चित ही कुछ तकनीकी खामिया भी रहीं हैं  बावजूद इसके इस महत्वपूर्ण चर्चा को आप तक पहुँचाने के उद्देश्य से प्रस्तुत है यह साक्षात्कार …..

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    By: नित्यानंद गायेन

    जन्म: 20 अगस्त 1981, शिखरबाली गाँव, बारुइपुर, दक्षिण चौबीस परगना, पश्चिम बंगाल।
    अपने हिस्से का प्रेम (2011) कविता-संग्रह। कविता केन्द्रित पत्रिका ‘संकेत’ का अंक इनकी कविताओं पर केन्द्रित| (संपादक –अनवर सुहैल )
    ‘समावर्तन’ में कवि /संपादक निरंजन श्रोत्रिय द्वारा रेखांकित
    ‘दुनिया इनदिनों’ में वरिष्ठ कवि एवं कव्यालोचक ओम भारती द्वारा रेखांकित |
    विभिन्न पत्र –पत्रिकाओं में कविताएँ व लेख प्रकाशित

    विविध:
    हैदराबाद से प्रकाशित हिंदी दैनिक ‘डेली हिंदी मिलाप राजभाषा पत्रिका’ एवं स्वतंत्र वार्ता में उप संपादक के तौरपर कार्यानुभव |
    ‘दुनिया इनदिनों साहित्य विशेषांक’ 2016 के समकालीन कविता खंड का अतिथि संपादन |
    कुछ कविताएँ बांग्ला भाषा में भी |
    कुछ कविताओं का नेपाली, अँग्रेज़ी, मैथिली तथा फ़्राँसिसी भाषाओँ में अनुवाद।

    सम्प्रति : दिल्ली से प्रकाशित हिंदी साप्ताहिक ‘दिल्ली की सेल्फी’ में कार्यकारी संपादक |

    संपर्क : 8860297071 [email protected]

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