कविता प्रेम है, प्रकृति है, सौन्दर्य है और सबसे ऊपर एक माध्यम है खुद के प्रतीक बिम्बों में समाज के धूसर यथार्थ को उकेरने का | जैसे खुद से बतियाते हुए मानस को सुनाना या मानस से बतियाते हुए खुद को सुनाना | कुछ ऐसे ही अनेक अंतर्द्वंदों से जूझते समाज में खुद को स्पेस खोजतीं अंकिता पंवारकी कुछ कविताएँ ……| संपादक

मंडी हाउस में एक शाम 

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अंकिता पंवार

  1. वह सोचता रहा

उसने तो कहा था

गिटार बजाते हुए लड़के

उसे आ जाया करते हैं पसंद अक्सर

झनझनाते रहे तार और वह गाता रहा

एक हसीना थी….

किसी गुजरी हुई शाम की याद में

2

और वह खींचती रही आड़ी तिरछी रेखायें

फाइल के पन्नों मे कुछ इधर उधर देखते हुए

ठंडी हो चुकी चाय के प्याले में अटका रह गया कोई

तस्वीर में उतरने से कुछ  पहले ही

वह ताकती रह गयी दिशाओं को

3

नाटक-करते करते वह

सच में ही रो पड़ा अभिनय की आड़ में

गूंजती रही तालियां

और वह सोचता रहा

यह अभिनय की जीत है या उसकी हार

और कविता करते हुए

वह कहती रही

बस लिखती रही यूं ही किसी के लिये

तुम्हें सुनाऊं

शब्दों का खयाल अच्छा है

4

चाय और अंडे बनाती वो और उसका पति

परौसते हुए सोच रहे थे

कच्चे मकान और

ठिठुरती शामें कितनी लम्बी होंगी अब की बार

5

मंडी हाउस की के ऊपर लटका हुआ चांद

और तुम

एक बार फिर ये शाम अच्छी है.

2. मेरा मां बनना 

 

साभार google से

साभार google से

हमारे साझा प्रेम से उपजे

मेरे पेट के भ्रूण को संभालना या उसको नष्ट करना

निर्भर करता है

मेरे होने या न होने की स्थितियों पर

मेरे पेट में बढते भ्रूण का होना

न तुम्हारी इच्छा पर निर्भर करेगा

ना ही यह तुम्हारी निर्मूल आशंकाओं के अनुरूप

तुम्हें जिंदगी भर बांधे रखने की साजिश है

ना ही ये कोई मां की कोख के होने से उपजा प्रेम है

मेरा मां बनना इस पर निर्भर नहीं करता कि

तुम पिता की जिम्मेदारी लोगे या नहीं

ये निर्भर करता है

अपने शरीर के हिस्से को बचाये रखने की मेरी इच्छा पर

हे मेरे दोस्त हे मेरे प्रेमी

मैं एक नया जीवन जीने की ओर अग्रसर हूं

हमेशा की तरह

क्योंकि मेरा जीवन किसी और का अधूरा हिस्सा नहीं

3 अधूरे प्रेम की पूरी दुनिया 

 

ओ मेरे साथी

तुम मुझे बहुत अच्छे लगते हो

मैं कर सकती हूं तुमसे अधूरा प्रेम

क्योंकि बहुत कुछ घट जाने के बाद

अधूरा हिस्सा ही बचा रह सकता है किसी के जीवन मे

पर मैं अब करना भी नहीं चाहती पूरा प्रेम

मैं जानती हूं वह प्रेम हो सकता है

खतरनाक किसी भी स्त्री के लिये

वह प्रेम बना सकता है किसी स्त्री को बहुत ही कमजोर

मैं कर सकती हूं तुमसे अधूरा प्रेम

क्योंकि मैं बचा लेना चाहती हूं

खुद में एक पूरा संसार

अपनी इच्छाओं और सपनों की संभावित दुनिया का

एक प्रेम जो लील लेना चाहता है समूचे स्त्री जीवन को

एक प्रेम जो नहीं मानता

एक स्त्री का प्रेम रह सकता है जिंदा अपनी

तमाम आकांक्षाओं के साथ

एक प्रेम जो ले आता एक स्त्री को घर

और उस घर की परिक्रमा करते करते वह

सच में मानने लगती है कि वो समूची पृथ्वी की परिक्रमा कर रही है

एक स्त्री सपनों में उड़ने के दृश्य नहीं

वो देखने लगती है एक बच्चे के रोने का  स्वप्न

तब वह स्त्री करने लगती है पूरा प्रेम

पर मैं करना चाहती हूं अधूरा प्रेम

अपनी पूरी दुनिया के साथ

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