टुन्ना पंडित को ये समस्या राम मंदिर जैसी बड़ी पेचीदा समस्या लगी इसलिए तत्काल एक पुड़िया निकाली.. मुहं में डाल कर बोले..मुल्ला जी समस्या बहुत कठिन है, वो भी आजकल के माहौल में…अब मोहल्ले की बात है तो कुछ तो करना पड़ेगा ….इस समस्या का एक समाधान है ..ऐसा करो मैं गाय को अडॉप्ट कर लेता हूँ | पिता की जगह मेरा नाम लिखा दो और गाय का नाम गौरी मिश्रा लिखवा दो …..

मुल्ला जी की गाय

अनीता मिश्रा

कानपुर के मेस्टन रोड में रहने वाले मुल्ला जी तनाव में आ गए, जबसे पता चला कि गाय के लिए भी आधार कम्पलसरी हो गया है ..मुल्ला जी तो आजकल वैसे ही डरे -डरे रहते थे कि कब किसी गाय प्रेमी की नज़र उनकी गाय पर पड़ जाए और उसका जाने क्या मतलब निकाला जाए | कुछ अर्सा पहले ही गाय खरीदी थी ..छोटी लडकी का हाज़मा ऐसा था कि डाक्टर ने गाय का दूध बोला था…अब और नई मुसीबत आधार बनवाओ …खैर मरता क्या न करता …मुल्ला जी गए, आधार वाले विभाग में …वहां अपना नाम बताया तो क्लर्क बोला, ‘’तुम मुसलमान हो अब नाम क्या लिखाओगे अपनी गाय का’’ …मुल्ला जी बोले, ‘’जनाब हम तो मुन्नी कहते हैं अब क्या लिखाये” …क्लर्क बोला, ‘’कायदे का नाम बताओ घर वाला नहीं’’ ..अब मुल्ला जी परेशान कि मुन्नी कभी स्कूल नहीं गई तो क्या लिखायें ..खैर कुछ तो बताना था तो बोले, ‘’शबाना जमाल लिख दीजिये वल्द अशरफ जमाल’’
…अब क्लर्क गुस्साया, ‘’तुम गाय के वालिद कैसे हो सकते हो… गाय हिन्दू है और खुद माता है कोई अपनी माता का बाप कैसे हो सकता है ‘’….अब मुल्ला जी परेशान आधार में बाप का नाम चाहिए होगा ….समस्या हल करने मोहल्ले में पास वाले पंडित जी टुन्ना गुरु के पास गए |
उनको समस्या बताई ..टुन्ना पंडित जी जो हर वक़्त बाबा भोले के प्रसाद में टुन्न रहा करते थे | एकाएक अफलातूनी मुद्रा में आ गए जब पंडित जी ज्यादा सोचते थे तो एक पुड़िया मसाला मुहं में डाल लिया करते थे | टुन्ना पंडित को ये समस्या राम मंदिर जैसी बड़ी पेचीदा समस्या लगी इसलिए तत्काल एक पुडिया निकाली.. मुहं में डाल कर बोले..मुल्ला जी समस्या बहुत कठिन है, वो भी आजकल के माहौल में…अब मोहल्ले की बात है तो कुछ तो करना पड़ेगा ….इस समस्या का एक समाधान है ..ऐसा करो मैं गाय को अडॉप्ट कर लेता हूँ |
पिता की जगह मेरा नाम लिखा दो और गाय का नाम गौरी मिश्रा लिखवा दो ….मुल्ला जी बोले, “पर मै मुन्नी को दूंगा नहीं” …पंडित जी बोले, “अरे मुन्नी की वजह से तुम लोग बदनाम हो जाओगे …गाय यहाँ रहेगी और दूध तुम ले जाया करना | सेवा भी तुम्ही कर देना आखिर तुम्हें बेटी के लिए दूध ही चाहिए | एक गिलास ले जाना और मै आधार कार्ड में पिता का नाम दूंगा मुन्नी को और सुरक्षा भी गो रक्षकों से तो बाकी दूध मेरे यहाँ”…अब कोई रास्ता न था तो मुल्ला जी राजी हो गए….
एक ही दिन में मुन्नी जमाल एकदम से गौरी मिश्रा वल्द टुन्ना मिश्रा हो गईं
..मोहल्ले के लोग कहने लगे मुन्नी की घर वापसी हो गई वर्ना एकदिन काट डाली जाती… मुल्ला जी का लड़का या मुल्ला जी नियमित रूप से मुन्नी की सेवा करते और एक गिलास दूध ले जाते, बाकी का टुन्ना पंडित जी अपने पास रखते ….कुछ दिन तक यही चला एक दिन मुल्ला जी मुन्नी -मुन्नी करते आये, देखा कि अपनी जगह पर मुन्नी नहीं तो चौंक कर पूछा, “पंडित जी मुन्नी कहाँ गई ?” पंडित जी पुड़िया मुहं में डाल कर बोले, “मुल्ला जी मुन्नी को हम बेच दिए ..बड़ी खोखट सारे दिन ….भई ..अब कौनो खोल के ले जाए, कोई कांड कर दे तो आप ही की मुसीबत होती …बार –बार मिलने आते थे” …..मुल्ला जी हैरान होते हुए लगभग रुआंसी आवाज में बोले, “पर पंडित जी वो तो हमारी थी ..हमें बड़ी मोहब्बत थी उससे” ….पंडित जी थोडा ऊंची आवाज में बोले, ‘’जय भोलेनाथ, …मुल्ला जी, मुन्नी अब आपकी नहीं देश की है …और सारे देश को उससे मोहब्बत है.’’

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