इंसान होने के एहसासात के साथ संवेदनाओं को छूती हुई अशोक तिवारी  कविताएँ ……… संपादक 

वो हाथ…

अशोक कुमार तिवारी

अशोक कुमार तिवारी

काम करते वो हाथ
जो हों किसी भी देश में
किसी भी मिट्टी से जुड़े हों
उनके सरोकार
जो रुकते नहीं हैं…….
चलते ही जाना होता है जिन्हें
वो हाथ जो
आने वाले दिनों की तस्वीर को
रखते हैं हमारे सामने
अपने काम के ज़रिये

वो हाथ जो
ख़ूबसूरत बनाते हैं
दुनिया के हर नज़ारे को
क़रीने से रखते हैं
चीज़ों को
वो हाथ जिन्हें हम महसूस कर सकते हैं
रास्ते पर चलते हुए

काम करती उन हथेलियों की ठेकों के उभार
में भरा हुआ है ज़माने भर का दर्द
जिनकी गरमाहट
और थपथपाहट की मुलामियत
का अहसास भर सकते हैं हम अपने अंदर

वो हाथ
जिन्हें देख सकते है
ख़ूबसूरत क्यारी के पास से गुज़रते हुए
लिपटे होते हैं जो
फूलों के इर्द-गिर्द
वो हाथ जो
नज़र न आते हुए भी
मौजूद रहते हैं
हर जगह
वो हाथ
ख्याल रखते हैं हरदम
दूसरों की सहूलियत का

वो हाथ जो
चिकनी सपाट सड़क के
कोलतार में छिपे होते हैं
खेतों की मेढ़ों और बीजों पर
छपे होते हैं जिनके निशान
उत्पादन की कुंजी
लिभड़ी होती है जिनमें
जो इश्क करते हैं अपने काम से

वो हाथ जो तिरस्कार
और अवहेलना के बावजूद
बिछे रहते हैं
हरदम काम के लिए
जो सहलाते हैं
प्यार की थपकी देकर
आने वाली हर चुनौती को
वो हाथ चलते रहते हैं
आपके साथ
और आपको अहसास ही नहीं होता

वो हाथ
जो कठपुतली की मानिंद
काम करते हैं
वो हाथ जो
हर काम में एक जूनून और
संवेदना भरते हैं
वो हाथ जो
कायनात की ख़ूबसूरत रचना हैं
तय करते हैं
प्रतिमान सौंदर्यशास्त्र के
जो दुनियादारी को बहाल करने में
झोंकते हैं अपनी ताक़त
किसी भी काल और स्थान से परे !!

शब्द

शब्द चलते हैं
दौड़ते हैं
भागते हैं इधर-उधर
डरते हैं – डराते हैं
मौन होकर कभी
नोट करते हैं हलचल
सुनते हैं होने वोली आहटों को शब्द
और तसल्ली देते हैं
अपने अंदर के अराजक शब्दों को

शब्द जोड़ते हैं
तोड़ते हैं बनी -बनाई लीक को
अफरा-तफरी करते हैं शब्द
शब्द ही हैं
जिनकी नोंक
विषबुझी तीर सी
होती है नुकीली
शब्द मरहम होते हैं
प्यार होते हैं
दुत्कार होते हैं
होते हैं संस्कृति के रचियेता शब्द ही

विकास और विनाश के
फ़र्क को जानते हैं शब्द
आपसी रिश्तों को पहचानते हैं
प्यार की गहराई को मानते हैं शब्द

शब्द लफ़्फ़ाज़ी नहीं होते
वाग्जाल नहीं होते
नहीं होते हमलावर या षणयंत्रकारी
व्यवस्थित तंत्र का
हिस्सा होते हैं शब्द
जो परास्त करना और होना
दोनों ही जानते हैं

शब्द अन्यायी आवाज़
सुनने में नहीं
वाज़िब उत्तर देने में भी होते हैं
ये शब्द जो ज़िंदा रहते हैं
हर समय और काल में
हमारी वसीयत है
जो हिस्सा हैं हमारी विरासत का

कुछ शब्द
कल के लिए होते हैं
जो बीत जाते हैं.…
कुछ कल को लिए होते हैं
जो इंतज़ार में होते हैं
बीतने के लिए नहीं
ताक़त हासिल करने
इंसानियत के लिए

Leave a Reply

Your email address will not be published.