“इन जीजाओं की किस्मत उस वक़्त खुल जाती है जब इन्हें कोई इनके जैसी मजेदार साली मिल जाती है. मसलन जीजा ने लिखा ‘बहुत शनदार’ तो साली साहिबा एक आँख बंद वाली इमोजी बनाते हुए लिखेंगी ..’क्या ? मैं या मेरी ड्रेस’ बस फिर तो मानो जीजा जी की लाटरी लग जाती है. फिर जीजा जी अपने सड़े हुए शेरों को ग़ालिब साहेब का नाम देकर चेपते हुए लिख देते हैं कि ड्रेस तो इसलिए सुन्दर है क्योंकि आपने उसको पहना है. अब ब्यूटी एप के प्रयोग से खींची हुई फोटो पर शेर देखकर साली साहिबा को भी लुत्फ़ आ जाता है.” ‘अनीता मिश्रा’ का सामयिक व्यंग्य …..

सोशल मीडिया के ‘जीजा जी’ 

अनीता मिश्रा

अनीता मिश्रा

जैसे रियल दुनिया में कुछ जीजा जी लोग होते हैं जो हर वक़्त हंसी ठिठोली के मूड में रहते हैं. ऐसे ही सोशल मीडिया में कुछ जीजा जी टाइप लोग होते हैं जो हर वक़्त चुहलबाजी के मूड में रहते हैं. इन जीजा जी लोगों की खासियत होती है ये कभी किसी पोस्ट पर अपने विचार नहीं प्रकट करते हैं. ये बस फोटो पोस्ट करते ही जाने कहाँ से अवतरित हो जातें हैं. फोटो पर इनके एक से एक मजेदार कमेन्ट होते हैं, बहुत खूब , अद्भुत , जोरदार , अनुपम छवि आदि –आदि. इनका वश चले तो अजूबे विशेषण फोटो में घुस कर लिख आयें.

इन जीजाओं की किस्मत उस वक़्त खुल जाती है जब इन्हें कोई इनके जैसी मजेदार साली मिल जाती है. मसलन जीजा ने लिखा ‘बहुत शनदार’ तो साली साहिबा एक आँख बंद वाली इमोजी बनाते हुए लिखेंगी ..’क्या ? मैं या मेरी ड्रेस’ बस फिर तो मानो जीजा जी की लाटरी लग जाती है. फिर जीजा जी अपने सड़े हुए शेरों को ग़ालिब साहेब का नाम देकर चेपते हुए लिख देते हैं कि ड्रेस तो इसलिए सुन्दर है क्योंकि आपने उसको पहना है. अब ब्यूटी एप के प्रयोग से खींची हुई फोटो पर शेर देखकर साली साहिबा को भी लुत्फ़ आ जाता है.

वो मासूम सा उलाहना देते हुए कहती हैं कि ‘’ अरे ये बस यूँ ही जल्दी में ली हुई फोटो है आपने ज्यादा तारीफ कर डाली. इस बात पर जीजा जी सोचते हैं तीर निशाने पर लगा है और खुश होकर तत्काल एक फ़िल्मी गाने का लिंक निकाल कर डेडीकेट कर देते हैं ..यूँ तो हमने लाख हंसी देखे हैं तुम सा नहीं देखा.

कभी–कभी जीजा जी लोग पाजिटिव रेस्पांस से इतने उत्साह में आ जाते हैं कि इनबॉक्स में जाकर पता और फोन नंबर मांगने लगते हैं, तब साली जी को लगता है बड़ा चिपकू आदमी है. कई दफा तारीफ से उत्साहित कोई साली गलती से नंबर दे बैठती है और कभी- कभी जीजा जी को ग़लतफ़हमी हो जाती है किसी धाकड़ फेमिनिस्ट से भी ऐसी गलती कर बैठते हैं तब जीजा जी का स्क्रीन शॉट बनकर वाल पर लग जाता है.

कुछ जीजा जी लोग समाजवादी टाइप होते हैं वो एक समान भाव से सबकी एक ही तरह के शब्दों से तारीफ करते हैं, ऐसा लगता है इन्होंने कुछ शब्द स्थाई रूप से टाइप करके रख लिए हैं उन्हीं को हर जगह चेपते रहते हैं. वैसे अब लड़कियां भी बहुत स्मार्ट है और सोशल मीडिया में काफी एक्टिव हैं, इसलिए कुछ ही हैं जो ऐसे जीजाओं के झांसे में आती है, वर्ना इन तारीफों की हकीकत वो खूब समझती हैं. तारीफ के बल पर फोन नंबर पाने और मिलने की आस लिए तमाम जीजाओं को मजा चखाकर लड़कियां आगे बढ़ जाती हैं

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