कविता अभिव्यक्ति का वह आलोड़न है जो सहज ही व्यक्तिगत स्पन्दनों को समष्टिगत भावों की ओर अग्रसर कर देता है । ह्रदय स्पंदन से फूटती मानवीय अभिव्यक्ति, सामाजिक धरातल पर यथार्थ रूप लेतीं लतिका बत्राकी कुछ कविताएँ….. | – संपादक

हाशिये पे खडे़ लोग

लतिका बत्रा

हाशिये पे खडे लोग ही
बनते है मील के पत्थर
धारा में होने का गर्व
पांव कब उखाड़ दे–
क्या पता ।
किनारे खडे़ –
रोपते रहे जो
संवेदनाओं के बीज
मन की सीजी मिट्टी में
कोंपलें जो फूटेंगी
रंग चटक हो या सोम्य
जो भी हों —
हरितिमा पुर सकून होगी ।

 अपना अपना अहं

तुमने कहना चाहा
समर्पण
मैने देना चाहा
समर्पण ….
और
समर्पण टंगा रहा हमारे इर्द गिर्द
रिक्त व्योम में
छलनाओं के छल्लों जैसा ।
कौन करता पहल —
अंह हठात हमें ठेलता रहा
दूर —
दूरतर —
प्रेम
अपने गीत की यति पर
पढ़ाव डाले ठिठका रहा ।
हम
लिख लिख कर मिटाते रहे
उम्मीदों के अनुबन्ध ।
अन्यमनस्क ह्रदय का एक कोना
अलक्षित,
स्पन्दित –
बिखरता रहा अह्वान में तुम्हारे ।
चुपके चुपके प्रतिक्षारत
जैसे —
सागर के तलछट से
चुरा कर कोई वेगवती उन्मत लहर

बिखेर जाये बेशकीमती मोती
सूने दरदरी रेत भरे निर्जन तट पर ।

आओ चुन लो
सम्बन्धों के कागारों पर
ये बिखरे मोती ,
लिख दो मेरी मुंदी पलकों पर
समर्पण का एक नवल इतिहास
कि
मैं
आज भी खडी़ हूं उन्हीं कागारों पर

आह ! ये हमारा अनुशापित अंह ।

 ताकि सनद रहे 

क्या तुम्हे नही लगता कि अब
समय आ गया है
क्रांति का
हालात ने तोड दिया है सब कुछ
बजरी सा बिछा दिया है राजपथ पर
अब
फुटपाथ पर जमा भीड ही है बस
ले दे कर मेरे पास

तुम चाहे कितनी मर्तबा भी करो घोषित
स्त्री विलाप
स्त्री विमर्श ,
जुगाड —
पोपले मुँहों की खिसियाई
हें हें हें भर सिद्ध होता है
और
बातों के साथ उडते है
थूकों के छींटे ।

जानी पहचानी स्थापित छवियाँ
धुंधलाने लगी है सृजन के
शफ्फाक उजले ताजे आयाम
कि
अब यलगार हो गा ।
जन्मे गा नया अध्याय
विध्वंस जनित
गहरी लकीर की तरह उकेरा जाये गा
ये आन्दोलन नये रचित इतिहास में
बीते हुये लोगों के चेहरों पर छा जायेगा
भयाक्रांत चिन्ताओ की झुरियों जैसे
कुर्सी के पाये दीमक लगे
दरकने लगेगे
एक एक कर …..

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    By: लतिका बत्रा

    शिक्षा — एम . ए , एम फिल . दिल्ली युनिवर्सिटी
    प्रकाशन — उपन्यास तिलांजलि, एक कुक बुक
    गृहशोभा, पत्रिका में नियमित रेसिपी प्रकाशित।
    सरिता , गृहशोभा , सुमनसौरभ , शुभतरिका इत्यादी पत्रिकाऔ मे लेख व कहानियां प्रकाशित ।

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