मैं पीछे क्यों रहूँ

हम तो ऐसे ही देखेंगे…..! संपादकीय आलेख (अनीता चौधरी)

हम तो ऐसे ही देखेंगे…..!  अनीता चौधरी बहुत दिनों बाद, कल एक मित्र से मुलाक़ात हुई | सरकारी नौकरी करते हैं तो काफी दिनों बाद ही मिलना-मिलाना हो पाता है| बोले, ‘क्या बताऊँ आजकल बहुत ही त्रस्त चल रहा हूँ | मेरे ... Read More...

किसने बिगाड़ा मुझे: आत्मकथ्य (डा० विजय शर्मा)

यूं तो इंसानी व्यक्तित्व के बनने बिगड़ने में हमारे सामाजिक परिवेश की बड़ी भूमिका होती है किन्तु इस बिगड़ने “इंसान बनने” के लिए सामाजिक असमानताओं और विषमताओं के खिलाफ मन में उठते सवालों को न मार कर उनके जबाव खोजने ... Read More...
चौधरी ‘अमरीका’: कहानी (संदीप मील)

स्वतंत्रता दिवस के जश्न की सार्थकता: संपादकीय (हनीफ मदार)

स्वतंत्रता दिवस के जश्न की सार्थकता  सौ में सत्तर आदमी फ़िलहाल जब नाशाद हैं दिल पे रखकर हाथ कहिये देश क्या आज़ाद है | अदम गौंडवी साहब को क्या जरूरत थी इस लाइन को लिखने की | खुद तो चले गए लेकिन इस विरासत को हमे... Read More...
मरना कोई हार नहीं होती: संस्मरण (हरिशंकर परसाई) -: परसाई द्वारा मुक्तिबोध पर लिखा गया संस्मरण :-

अली मंजिल: कहानी (अवधेश प्रीत)

‘अली मंजिल’ अवधेश प्रीत की हमरंग पर प्रकाशित होने वाली दूसरी और बहु चर्चित कहानी है|  कहानी अली मंजिल बिना किसी शोर के बिना किसी प्रत्यक्ष मानवीय त्रासद घटना के एक दम मौन रूप में भी न केवल मानवीय संवेदनाओ... Read More...

उद्घाटन: कहानी (हनीफ मदार)

1 जनवरी 2015 को नव वर्ष के अवसर पर सफ़दर हाशमी को समर्पित कोवलेन्ट ग्रुप द्वारा आयोजित कार्यक्रम “तू ज़िंदा है, मैं ज़िंदा हूँ ” में इस कहानी ‘उद्घाटन’ का चारित्रिक पाठ हुआ था | बेहद सफलतम इस कार्यक्रम की रि... Read More...

कुंजड़-कसाई: कहानी (अनवर सुहैल)

अनवर सुहैल कुंजड़-कसाई ‘कुंजड़-कसाइयों को तमीज कहाँ… तमीज का ठेका तो तुम्हारे सैयदों ने जो ले रक्खा है?’ मुहम्मद लतीफ कुरैशी उर्फ एम एल कुरैशी बहुत कम बोला करते। कभी बोलते भी तो कफन फाड़कर बोल... Read More...
एक शरीफ सांड की सच्ची कहानी… लघुकथा (सुजाता)

एक शरीफ सांड की सच्ची कहानी… लघुकथा (सुजाता)

                  सुजाता एक शरीफ सांड की सच्ची कहानी… फोटो गूगल से साभार कहने को वह एक सांड था लेकिन मरखना नहीं था।शरीफ था। दिनभर मतवाला सा जंगल मे घूमता और साँझ ढले गाम आ जाता था। ... Read More...
तीन मुलाकातें: कहानी (डा0 नमिता सिंह)

तीन मुलाकातें: कहानी (डा0 नमिता सिंह)

     डा0 नमिता सिंह तीन मुलाकातें मेरी और मिताली की पहली मुलाकात देहरादून में हुई थी। वहाँ के गवर्नमेंट गर्ल्स कालेज में दो दिन की सेमिनार थी। कथा साहित्य पर कोई विषय था। ‘विचार और सर्जनात्मकत... Read More...
गोदान: उपन्यास ‘भाग 1’ (प्रेमचंद)

गोदान: उपन्यास ‘भाग 1’ (प्रेमचंद)

गोदान (उपन्यास- भाग 1) होरीराम ने दोनों बैलों को सानी-पानी दे कर अपनी स्त्री धनिया से कहा – गोबर को ऊख गोड़ने भेज देना। मैं न जाने कब लौटूँ। जरा मेरी लाठी दे दे। धनिया के दोनों हाथ गोबर से भरे थे। उपले ... Read More...