निर्लज्ज !: लघुकथा (सुशील कुमार भारद्वाज)

निर्लज्ज !: लघुकथा (सुशील कुमार भारद्वाज)

‘सुशील कुमार भारद्वाज’ की लघुकथायें छोटी-छोटी घटनाओं के यथावत चित्रण के रूप में सामने आती हैं | जहाँ भूत-भविष्य की लेखकीय कल्पना और उपदेश उतने ही आच्छादित रहते हैं जितने जन सामान्य के बीच घटित होने वाली घ... Read More...
वाया बनारस अर्थात् फिसल पड़े तो हर गंगे- भाग 2: यात्रा वृत्तांत (पद्मनाभ गौतम)

निरुद्देश्य कुछ नहीं होता: विवेचन “HUMRANG”

हमरंग का एक वर्ष पूरा होने पर देश भर के कई लेखकों से ‘हमरंग’ का साहित्यिक, वैचारिक मूल्यांकन करती टिपण्णी (लेख) हमें प्राप्त हुए हैं जो बिना किसी काट-छांट के, हर चौथे या पांचवें दिन प्रकाशित होंगे | हमारे... Read More...
आश्वस्त करती है !: (डा० विजय शर्मा) हमरंग का एक वर्ष पूरा होने पर देश भर के कई लेखकों से ‘हमरंग’ का साहित्यिक, वैचारिक मूल्यांकन करती टिपण्णी (लेख) हमें प्राप्त हुए हैं जो बिना किसी काट-छांट के, हर चौथे या पांचवें दिन प्रकाशित होंगे | हमारे इस प्रयास को लेकर हो सकता है आपकी भी कोई दृष्टि बनी हो तो नि-संकोच आप … सीमा आरिफ़ जन्म-10 दिसम्बर 1986 उत्तर प्रदेश ( ज़िला बिजनौर) जामिया मिल्लिया इस्लामिया दिल्ली से इतिहास में पोस्ट ग्रेजुएशन एवं जर्नलिज्म में डिप्लोमा PSBT की डॉक्यूमेंट्री फिल्म -"There is something in the Air" में अभिनय ( फिल्म 2011 में केरल फिल्म और कोरियन फिल्म फेस्टिवल द्वारा राष्ट्रीय फिल्म पुस्कार से सम्मानित) तीन वर्ष तक नवभारत टाइम्स ऑनलाइन में लेखन विभिन्न मैगज़ीन,न्यूज़ पेपर्,पोर्टल में लेखक के रूप में सक्रीय टिप्पणियां 10 months ago 2 “हमरंग” की टीम से एक खुशनुमा भेंट: (सीमा आरिफ़)

“हमरंग” की टीम से एक खुशनुमा भेंट: (सीमा आरिफ़)

हमरंग का एक वर्ष पूरा होने पर देश भर के कई लेखकों से ‘हमरंग’ का साहित्यिक, वैचारिक मूल्यांकन करती टिपण्णी (लेख) हमें प्राप्त हुए हैं जो बिना किसी काट-छांट के, हर चौथे या पांचवें दिन प्रकाशित होंगे | हमारे... Read More...

15 अलविदा, 16 के स्वागत में ‘अश्विनी आश्विन’ की दो ग़ज़लें

चुप्पी और वेवशी के रहस्यमय बाने में लिपटे जाते हुए २०१५ को अलविदा कहते हुए २०१६ के आगमन पर बेहतर सामाजिक और मानवीय परिकल्पना में कुछ गहरे इंसानी सवालों से जूझती ‘अश्विनी आश्विन’ की कलम …… | – संपादक  1... Read More...
“अनवर सुहैल” की तीन ‘लघु कथाएं’

“अनवर सुहैल” की तीन ‘लघु कथाएं’

निशब्द, दंश, छटपटाहट फिर सवाल ….. कोई जबाव नहीं ….. कलम , अभिव्यक्ति …..? अनवर सुहैल फ़र्क़ फुटपाथ पर दोनों की गुमटियां हैं। एक मोची की, दूसरी धोबी की। मोची शूद्र और धोबी मुसलमान। दोनों फुर्सत में अ... Read More...

गौ-हत्या: कहानी (अनवर सुहैल)

अनवर सुहैल जन्म-तिथि : 09 अक्टूबर 1964 जांजगीर (छत्तीसगढ़) प्रकाशित कृतियाँ : उपन्यास पहचान : 2009, कथा संग्रह : कुंजड़ कसाई : 1995, गहरी जड़ें : 2013 कविता : और थोड़ी सी शर्म दे मौला : 2003, संतो... Read More...
‘प्रदीप कान्त’ की दो ग़ज़लें:

‘प्रदीप कान्त’ की दो ग़ज़लें:

‘प्रदीप कान्त’ की दो ग़ज़लें  प्रदीप कांत अनुभूति, कविता कोश, रचना कोश, वर्तमान साहित्य, हरिगन्धा, जनसत्ता सहित्य वार्षिकी (2010), समावर्तन, बया, पाखी, कथादेश, इन्द्रपस्थ भारती, सम्यक, सहचर, अक्षर पर्व ... Read More...

ख़तरे में इस्लाम नहीं: एवं अन्य नज़्में (हबीब जालिब)

सदियों के रूप में गुजरते समय और देशों के रूप में धरती के हर हिस्से याने दुनिया भर में लेखकों कलाकारों ने सच बयानी की कीमत न केवल शारीरिक, मानसिक संत्रास झेलकर बल्कि अपनी जान देकर भी चुकाई है …. इनकी गवाहि... Read More...
“लिओ तोलिस्तोय” की कुछ लघु कथाएं (अनूदित)

“लिओ तोलिस्तोय” की कुछ लघु कथाएं (अनूदित)

छोटी किन्तु बड़े प्रतीक संदर्भ प्रस्तुत करतीं “लिओ तोलिस्तोय” की इन पांच कहानियों में  चार कहानियां ‘सुकेश साहनी’ द्वारा अनूदित हैं वहीँ पांचवीं कहानी का अनुवाद ‘प्रेमचंद’ ने किया है  |  दयामय की दया ... Read More...

संपादक न तो सोया है और न ही सोने की कोशिश कर रहा है: (सुशील कुमार भारद्वाज)

हमरंग का एक वर्ष पूरा होने पर देश भर के कई लेखकों से ‘हमरंग’ का साहित्यिक, वैचारिक मूल्यांकन करती टिपण्णी (लेख) हमें प्राप्त हुए हैं जो बिना किसी काट-छांट के, हर चौथे या पांचवें दिन प्रकाशित होंगे | हमा... Read More...