जीवन की अभिव्यक्ति का सशक्त माध्यम है फिल्म : समीक्षा

जीवन की अभिव्यक्ति का साहित्य भी एक माध्यम है और फिल्म भी, अंतर केवल इतना है कि फ़िल्म अपनी बात दृश्यात्मक विधान द्वारा दर्शक और समाज के सामने आती है, वहीं साहित्य पुस्तकों में अभिव्यक्त भाषा के माध्यम से ... Read More...
जन कवि ‘वीरेन डंगवाल’ को आखिरी सलाम (हमरंग)

जन कवि ‘वीरेन डंगवाल’ को आखिरी सलाम (हमरंग)

इस त्रासद समय में भी ‘उजले दिन जरूर आएंगे’ का भरोसा दिलाने वाले साथी जन कवि ‘वीरेन डंगवाल’ हमारे बीच नहीं रहे | आज सुबह उन्होंने अंतिम सांस ली ….| इस जन साहित्यिक त्रासद पूर्ण घटना से दुखी सम्पूर्ण हमरंग... Read More...

थम गया संगीत का एक और स्वर: “रवींद्र जैन”

कालाकार कभी अपनी चमक खोते नहीं हैं, बल्कि इनकी चमक कभी न डूबने वाले, कभी न टूटने वाले सितारों के समान है, जो दिन में, रात में अपनी आभा लिए झिलमिला रहे हैं। ‘रवींद्र जैन’ एक ऐसी पक्के साधक वाली शख्सियत का ... Read More...
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चरित्रहीन : कहानी

आज भी जिस समाज में पुरषों का इधर उधर मुहँ मारना उनकी पुरुषीय काबलियत माना जाता है और औरत के इंसान होने के हक़ की बात करना भी उसके चरित्रहीन होने का प्रमाण घोषित हो जाता हो उस समाज में औरत की अस्मिता से जुड़... Read More...
अवधेश प्रीत

समाज का विद्रूप चेहरा है ‘चांद के पार एक चाभी’ समीक्षा (कहानी संग्रह)

समाज का विद्रूप चेहरा है ‘चांद के पार एक चाभी’ कहानी संग्रह – चांद के पार एक चाभी लेखक – अवधेश प्रीत मूल्य – 199/- (पेपरबैक) प्रकाशक– राजकमल प्रकाशन, नई दिल्ली. वरिष्ठ कथाकार अवधेश प्रीत का... Read More...
अंतिम विदाई… ग़ज़लकार “आर॰ पी॰ शर्मा ‘महरिष” को

अंतिम विदाई… ग़ज़लकार “आर॰ पी॰ शर्मा ‘महरिष” को

अंतिम विदाई… ग़ज़लकार  “आर॰ पी॰ शर्मा ‘महरिष” को  आर पी शर्मा महरिष ग़ज़ल विधा में बहुत बड़ा नाम रखने वाले आर॰ पी॰ शर्मा ‘महरिष’ का कल रात 93 बरस की उम्र में मुंबई में निधन हो गया। वे ग़ज़ल के क्षेत्र म... Read More...
गोदान: उपन्यास भाग 2, (प्रेमचंद)

गोदान: भाग 4, उपन्यास (प्रेमचंद)

         प्रेमचंद गोदान: भाग - 4 होरी ने डाँटा – चुप रह, बहुत बढ़-चढ़ न बोल। बिरादरी के चक्कर में अभी पड़ी नहीं है, नहीं मुँह से बात न निकलती। धनिया उत्तेजित हो गई – कौन-सा पाप किया है, जिसके... Read More...
‘पंकज सिंह’ वे हमारी आवाजें थे…: आलेख (कौशल किशोर)

‘पंकज सिंह’ वे हमारी आवाजें थे…: आलेख (कौशल किशोर)

वे हमारी आवाजें थे… हम उन्हें पा लेंगे क्योंकि हमें उनकी जरूरत है | कवि-पत्रकार पंकज सिंह को जन संस्कृति मंच की श्रद्धांजलि…’राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य जन संस्कृति मंच, ‘कौशल किशोर’ की कलम से …… ‘पंकज... Read More...
कैसा है इंतिज़ार हुसैन का भारत: स्मरण शेष

कैसा है इंतिज़ार हुसैन का भारत: स्मरण शेष

७ दिसंबर १९२३ को डिवाई बुलंदशहर, भारत में जन्मे इंतज़ार हुसैन पाकिस्तान के अग्रणी कथाकारों में से थे | वे भारत पाकिस्तान के सम्मिलित उर्दू कथा साहित्य में मंटो, कृश्नचंदर और बेदी की पीढ़ी के बाद वाली पी... Read More...

इंडिया कॉफी हाउस का गुजरा हुआ जमाना: संस्मरण

पटना के ‘इंडिया कॉफी हाउस’ के बंद हुए अभी मात्र तीन वर्ष ही बीते हैं। पर उसकी याद ऐसे आती है जैसे कि वह कोई गुजरे हुए जमाने की सु-सुखद स्मृति हो।-  सूर्यनारायण चौधरी (सूर्यनारायण चौधरी को उनके जन्म द... Read More...