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धर्म: लघुकथा (सुशील कुमार भारद्वाज)

छोटी छोटी सामाजिक विषमताओं को रचनात्मकता के साथ लघुकथा के रूप में प्रस्तुत करने का कौशल है सुशील कुमार भारद्वाज की कलम में | धार्मिक संकीर्णताओं के ताने बाने में उलझे समाज के बीच से ‘इंसानी धर्म’ की डोर क... Read More...

…और फिर परिवार : कहानी (मज़कूर आलम)

मज़्कूर आलम की कहानी ‘और फिर परिवार’ एक बेहद मजबूर, बेबस और लाचार लड़की की त्रासदी लगी, जो खुद को विकल्पहीन महसूस कर आत्महत्या कर लेती है, लेकिन पुनर्पाठ में लगा कि कई बार स्थितियां आपसे बलिदान मांगती हैं... Read More...
गोदान: उपन्यास, भाग 5 (प्रेमचंद)

गोदान: उपन्यास, भाग 5 (प्रेमचंद)

  प्रेमचंद गोदान: उपन्यास, भाग 5 मेहता जी कह रहे थे – और यह पुरुषों का षड्यंत्र है। देवियों को ऊँचे शिखर से खींच कर अपने बराबर बनाने के लिए, उन पुरुषों का, जो कायर हैं, जिनमें वैवाहिक ... Read More...
आईए ‘नक्शाब जारचवी’ को जाने: सख्शियत (सैयद एस तौहीद)

आईए ‘नक्शाब जारचवी’ को जाने: सख्शियत (सैयद एस तौहीद)

आज फिल्मउद्योग में बाजारी प्रभाव और नित नए उगते चहरों कि भीड़ में गुम होते और हो चुके कई नामों में शामिल है बुलंद शहर में जन्मे  गीतकार  ‘नक्शाब जारचवी’ का नाम विसरे हुए इसी फनकार कि कुछ यादें ताज़ा करा रहे... Read More...
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फिर लौट आई कामिनी: कहानी (अनीता चौधरी)

सभ्यता एवं सभ्यता विकास की बराबर हिस्सेदार दुनिया की आधी आवादी को लेकर उसकी मुक्ति के साथ आधुनिक, शिक्षित और सभ्य समाज की परिभाषा गढ़ना हमें जितना आसान जान पड़ता है वहीँ वास्तविकता के धरातल पर उस मानसिकता क... Read More...
गोदान: उपन्यास, भाग 6 (प्रेमचंद)

गोदान: उपन्यास, भाग 6 (प्रेमचंद)

प्रेमचंद गोदान: उपन्यास, भाग 6 गोविंदी के हृदय में आनंद का कंपन हुआ। समझ कर भी न समझने का अभिनय करते हुए बोली – ऐसी स्त्री की आप तारीफ करते हैं। मेरी समझ में तो वह दया के योग्य है। मेहता ने आ... Read More...
गोदान: उपन्यास, भाग 6 (प्रेमचंद)

गोदान : उपन्यास, भाग 8 (प्रेमचंद)

प्रेमचंद गोदान: उपन्यास, भाग 8 मालती ने परिहास के स्वर में कहा – खुदा करे, मैंने गलत समझा हो, क्योंकि अगर मैं उसे सच समझ लूँगी तो तुम्हारे साए से भी भागूँगी। मैं रूपवती हूँ। तुम भी मेरे अनेक च... Read More...
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अनुचित: लहुकथा (सुशील कुमार भारद्वाज)

मन को समझाने भर के लिए कह लेते है कि हम इक्कीसवीं सदी में जी रहे है लेकिन आज भी इस पुरुष सतात्मक समाज में महिलाओं को वह हक़ या अधिकार नहीं मिलते जिनकी वे हकदार है | इसी दर्द को बयाँ करती है सुशील कुमार भ... Read More...
आगाज़: कहानी (शालिनी श्रीवास्तव)

जड़वत: कहानी (शालिनी श्रीवास्तव)

विचार, व्यवहार और हकीकत को परत दर परत उधेड़ती और एक सामाजिक सच्चाई का रचनात्मक ढंग से विवेचन करते हुए बेहतर कथ्य और शिल्प के साथ कैनवस पर उतरती कहानी शालिनी श्रीवास्तव को एक संभावनाशील लेखक होने की गवाही द... Read More...
गोदान: उपन्यास, भाग 7 (प्रेमचंद)

गोदान: उपन्यास, भाग 7 (प्रेमचंद)

         प्रेमचंद गोदान: उपन्यास, भाग 7 दातादीन ने होरी को बीच में डाल कर कहा – सुनते हो होरी, गोबर का फैसला? मैं अपने दो सौ छोड़ के सत्तर ले लूँ , नहीं अदालत करूँ। इस तरह का व्यवहार हुआ तो कै... Read More...