‘किताबों के प्रति दीवानगी’ पटना पुस्तक मेला 2015: (रविशंकर)

‘किताबों के प्रति दीवानगी’ पटना पुस्तक मेला 2015: (रविशंकर)

एक ऐसे समय में जब चारों तरफ़ बाज़ार का शोर अपने चरम पर है, और एक से बढकर एक मंहगी और विलासी चीज़ों का प्रलोभन दे, लोगों के मन पर हमले कर रहा है ! शहर के हृदय स्थल(गांधी मैदान) पटना, में पुस्तक मेले का आयोजन ... Read More...
आम आदमी को समर्पित: ग़ज़ल (मोहसिन ‘तनहा’)

आम आदमी को समर्पित: ग़ज़ल (मोहसिन ‘तनहा’)

मोहसिन तनहा आम आदमी को समर्पित मछलियों को तैरने का हुनर चाहिए। गंदला है पानी साफ़ नज़र चाहिए। बातों से न होगा हासिल कुछ यहाँ, आवाज़ में भी थोड़ा असर चाहिए। न देखो ज़ख्मों से बहता ख़ून मेरा, ... Read More...
प्रदीप कान्त की ग़ज़लें

प्रदीप कान्त की ग़ज़लें

(हिंदी गजलों में एक और शख्सियत : प्रदीप कान्त, उनकी कुछ ग़ज़लें humrang.com में पहली बार) प्रदीप कांत 1- पेड़ों पर जब झुकते हैं बादल तभी बरसते हैं पहचानो, सूरज हैं हम रोज़ यहीं से उगते हैं नीयत... Read More...

खो जाते हैं घर : कहानी (सूरज प्रकाश)

यथार्थ से जूझती बेहद मार्मिक और संवेदनशील कहानी ….. वरिष्ठ साहित्यकार सूरज प्रकाश की कलम से …| सूरज प्रकाश खो जाते हैं घर बब्बू क्लिनिक से रिलीव हो गया है और मिसेज राय उसे अपने साथ ले जा रह... Read More...

अश्विनी आश्विन: की ग़ज़लें

 शांत पानी में फैंका गया  पत्थर, जो पानी के ऊपर मजबूती से जम रही काई को तोड़ कर पानी की सतह तक जाकर उसमें हलचल पैदा कर देता है …… अश्विनी आश्विन की ग़ज़लें मस्तिष्क से होकर ह्रदय तक पहुंचकर उसी पानी की तरह व... Read More...

‘संध्या नवोदिता’ की ग़ज़लें….

(इन गजलों में दुष्यंत के बाद का विकास नज़र आता है. अनुभव और सम्वेदना के नए आयाम के साथ हिंदी गजल साहित्य को समृद्ध करती ग़ज़लें…humrang के पाठकों के लिए…………..संपादक) संध्या नवोदिता ग़ज़ल-1 जहाँ ... Read More...
विज्ञान और कला का समागम, विज्ञान प्रदर्शनी: रिपोर्ट (अनिता)

विज्ञान और कला का समागम, विज्ञान प्रदर्शनी: रिपोर्ट (अनिता)

“अब मैं उस बच्चे के प्रोजेक्ट के पास खडी थी जिसका नाम था “जीवन में गणित की भूमिका” (role of  mathemathics in life ) मेरे बिना पूछे ही इन छात्रों ने अपना परिचय आठवी कक्षा के आकाश और अंजली के रूप में दिया |... Read More...
ग़ज़ल : (डॉ. मोहसिन ख़ान ‘तनहा’)

ग़ज़ल : (डॉ. मोहसिन ख़ान ‘तनहा’)

आज ख़ास “माँ” को समर्पित डॉ. मोहसिन ख़ान ‘तनहा’ की एक ग़ज़ल डा0 मोहसिन खान ‘तनहा’ जो बीज था आज वो शजर है। ऐ माँ बस ये तेरा ही हुनर है। तेरी रोनक तेरा ही है उजाला, तू है तो ही ये मकान घर है।... Read More...
ग़ज़लें: (दिलशाद ‘सैदानपुरी’)

ग़ज़लें: (दिलशाद ‘सैदानपुरी’)

रंग मंच कि दुनिया में प्रवेश करने से पहले आपने ‘दिलशाद सैदानपुरी’ के नाम से गज़लें लिखना शुरू किया और यह लेखन का सफ़र आज भी जारी है | हमरंग के मंच से कुछ गज़लें आप सभी पाठकों के लिए, हमरंग पर आगे भी यह सफ़र ज... Read More...
ग़ज़ल: (उपेन्द्र परवाज़)

ग़ज़ल: (उपेन्द्र परवाज़)

उपेन्द्र परवाज़ आँख के मौसम जो बरसे, ज़िस्म पत्थर हो गये अब के सावन बारिशों से, बादल ही तर हो गये | इस कदर थे मोजज़े, अपने जुनूने इश्क के क़त्ल करने के बाद, खुद घायल ही ख़ंजर हो गये | उनके दिल क... Read More...