शालिनी श्रीवास्तव

मेरे हिस्से की धूप: कहानी (शालिनी श्रीवास्तव)

अपने भीतर खुद को खोजने की छटपटाहट एक ऐसे मैदान में ला खडा करती है जहाँ इंसानी वजूद के स्थापत्य के लिए सीधे जिंदगी से मुठभेड़ करनी होती है | स्त्री वर्ग की मुक्त मानवीय अभिव्यक्ति को आवाज़ प्रदान करती ‘शालिन... Read More...
‘प्रदीप कान्त’ की ग़ज़लें

‘प्रदीप कान्त’ की ग़ज़लें

आधुनिकता के साथ गजल की दुनियां में अपनी पहचान बना चुके ‘प्रदीप कान्त’ अपनी दो बेहतर गजलों के साथ हमरंग पर दस्तक दे रहे हैं ….आपका हमरंग पर स्वागत है …| – संपादक  प्रदीप कान्त 1 –  जल रहा सारा श... Read More...
पगली का तौलिया: लघु कथा (सुशील कुमार भारद्वाज)

पगली का तौलिया: लघु कथा (सुशील कुमार भारद्वाज)

मानवीय संवेदना को लेकर वर्तमान समय, समाज और सभ्यता से एक सवाल दुहराती छोटी कहानी …..|-  सुशील कुमार भारद्वाज पगली का तौलिया बाघ एक्सप्रेस के समस्तीपुर जंक्शन पहुंचते ही, भीड़ के साथ एक पगली भी उसमें च... Read More...
ग़ज़लें: (दिलशाद ‘सैदानपुरी’)

जरूर देखा है: ग़ज़ल (दिलशाद सैदानपुरी)

रंग मंच कि दुनिया में प्रवेश करने से पहले आपने ‘दिलशाद सैदानपुरी’ के नाम से गज़लें लिखना शुरू किया और यह लेखन का सफ़र आज भी जारी है | हमरंग के मंच से कुछ गज़लें आप सभी पाठकों के लिए, हमरंग पर आगे भी यह सफ़र... Read More...
neelambuj

‘नीलाम्बुज’ की ग़ज़लें: हमरंग

‘नीलाम्बुज’ की ग़ज़लें  नीलाम्बुज डी. यू. से नजीर अकबराबादी की कविताओं पर एम् फिल कर चुकने के बाद जे. एन. यू. के भारतीय भाषा केंद्र से ‘सामासिक संस्कृति और आज़ादी के बाद की हिंदी कविता’ पर पीएच. डी. जारी... Read More...
रसीद नं0 ग्यारह: कहानी (हनीफ मदार)

रसीद नं0 ग्यारह: कहानी (हनीफ मदार)

समय के बदलाव के साथ कदमताल करते हुए चलने एवं बेहतर जीवन यापन के लिए बेहतर शिक्षा व्यवस्था की जरूरत को समझने समझाने के भ्रम जाल के बीच, समय के साथ मुस्लिम समाज में भी पुरानी बंदिशें टूटने लगीं हैं| जलसे आद... Read More...
डॉ. मोहसिन ख़ान ‘तनहा’ की ‘ग़ज़लें’

डॉ. मोहसिन ख़ान ‘तनहा’ की ‘ग़ज़लें’

डॉ. मोहसिन ख़ान ‘तनहा’  डॉ. मोहसिन ख़ान ‘तनहा’ स्नातकोत्तर हिन्दी विभागाध्यक्ष एवं शोध निर्देशक जे. एस. एम. महाविद्यालय, 201, सिद्धान्त गृह निर्माण संस्था, विद्या नगर, अलीबाग – ज़िला रायगढ़ (महाराष्... Read More...
गोदान: उपन्यास, भाग 7 (प्रेमचंद)

मेरी पहली रचना: कहानी (प्रेमचंद)

प्रेमचंद मेरी पहली रचना उस वक्त मेरी उम्र कोई १३ साल की रही होगी। हिन्दी बिल्कुल न जानता था। उर्दू के उपन्यास पढ़ने-लिखने का उन्माद था। मौलाना शरर, पं० रतननाथ सरशार, मिर्जा रुसवा, मौलवी मुहम्म... Read More...

वाया बनारस अर्थात् फिसल पड़े तो हर गंगे – (भाग-1) यात्रा वृत्तांत (पद्मनाभ गौतम)

विकास या विकास की गति को शब्दों में, किसी सपनीली दुनिया की तरह, अपनी कल्पनाओं की उड़ान से भी एक कदम आगे के स्वरूप का वर्णन कर लें किन्तु यथार्थ के धरातल पर तमाम विकास के दावे और वादे कितना मूर्त रूप ले पाए... Read More...
लेखक: कहानी (प्रेमचंद)

लेखक: कहानी (प्रेमचंद)

बीसवीं सदी के शुरूआती दशकों से अपने लेखन से हिंदी साहित्य को “आम जन की आवाज़” के रूप में प्रस्तुत करने व साहित्य में सामाजिक और राजनैतिक यथास्थिति के यथार्थ परक चित्रण से, हिंदी साहित्य को एक नई दिशा देने ... Read More...