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एफ जी एम / सी यानि ‘योनि’ पर पहरा: आलेख (नीलिमा चौहान)

स्त्री  के बाहरी यौनांग यानि भग्नासा को स्त्री देह के एक गैरजरूरी , मेस्क्यूलिन और बदसूरत अंग के रूप में देखने की बीमार मानसिकता  का असल यह है कि पितृसत्ता को इस अंग से सीधा खतरा है । इस अंग के माध्यम से महसूस ... Read More...

आत्महत्या, एवं अन्य कवितायें (शहनाज़ इमरानी)

सामाजिक एवं राजनैतिक दृष्टि से निरंतर होते मानवीय क्षरण को देखती 'शहनाज़ इमरानी' की कवितायें ......... आत्महत्या  शहनाज़ इमरानी आत्महत्या पलायन है आत्महत्या की सोच अपरिपक्व होती है मुझे मालूम है मेरी ... Read More...
मैं पीछे क्यों रहूँ

स्त्री आत्मनिर्भर क्यों बने…?: संपादकीय (अनीता चौधरी)

स्त्री आत्मनिर्भर क्यों बने…?  अनीता चौधरी मेरे पड़ोस में रहने वाली बीस वर्षीय सुमन को उसके पति की दिमागी हालत ठीक न होने की वजह से ससुराल वालों ने घर से बाहर निकाल दिया है | वह पिछले करीब अठारह महीनों से अपन... Read More...

बांध: कहानी (कमलेश)

"देर रात एक नाव आती। नाव पर हथियार लिये कुछ लोग सवार रहते। बांध के चारो ओर नाव घूमती और जैसे ही कोई लड़की नजर आती हथियारबंद लोग उसे खींच कर नाव पर चढ़ा लेते। इसके बाद उस लड़की का पता नहीं चलता। जगदीश राय ने जहां श... Read More...

महात्मा गाँधी को चिट्ठी पहुँचे: व्यंग्य (हरिशंकर परसाई)

(“हरिशंकर परसाई: – चर्चा ज़ारी है …….” के दसवें दिन ……. परसाई की व्यंग्य रचना ‘महात्मा गाँधी को चिट्ठी पहुँचे’) महात्मा गाँधी को चिट्ठी पहुँचे  यह चिट्ठी महात्मा मोहनदास करमचंद गाँधी को पहुंचे. महात्माजी, मैं ... Read More...

दो गज़ ज़मीन, एवं अन्य कवितायें (अनुकृति झा)

हमरंग प्रतिवद्ध है उन तमाम संभावनाओं से परिपूर्ण कलमकारों को स्थान देने के लिए जो अपनी रचनाओं को लेकर किसी विशिष्टता के विभ्रम में नहीं हैं बल्कि स्पष्ट और प्रयासरत हैं, वेहतर सउद्देश्य रचनाशीलता के लिए | इस कड़... Read More...

वाया बनारस अर्थात् फिसल पड़े तो हर गंगे- भाग 2

पद्मनाभ गौतम द्वारा लिखे यात्रा वृत्तांत का दूसरा और अंतिम भाग – वाया बनारस अर्थात् फिसल पड़े तो हर गंगे- भाग 2  पद्मनाभ गौतम एक सप्ताह घर पर पर व्यतीत करने के पश्चात् मैं वापसी की यात्रा के लिए निकल पड़ा। ... Read More...

महाश्वेता देवी का जीवन और साहित्य: आलेख (कृपाशंकर चौबे)

महाश्वेता देवी को याद करते हुए 'कृपाशंकर चौबे' का आलेख ........ "संघर्ष के इन दिनों ने ही लेखिका महाश्वेता को भी तैयार किया। उस दौरान उन्होंने खूब रचनाएँ पढ़ीं। विश्व के मशहूर लेखकों-चिंतकों की रचनाएँ, इलिया एर... Read More...

बिना जूते ओलम्पिक पदक: व्यंग्य (एम० एम० चंद्रा)

"पूरी दुनिया में जूते फेंकने की परम्परा थोड़ी-सी नयी जरूर है, लेकिन समय, देश-काल के अनुसार यह अपने में परिवर्तन जरूर कर रही है . आज पूरी दुनिया में इसका प्रचलन बड़े पैमाने पर शुरू हो गया है. जिसका प्रारम्भ अमेरिक... Read More...

“कैराना सुर्ख़ियों के बाद” डाक्यूमेंट्री फिल्म

"कैराना सुर्ख़ियों के बाद" डाक्यूमेंट्री फिल्म  -: निर्देशक - नकुल सिंह साहनी :- पश्चिमी उत्तर प्रदेश के शामली जिले में स्थित एक छोटा सा कस्बा अभी पिछले दिनों मीडिया में छाया रहा | जून २०१६ में यहाँ के सांसद न... Read More...