हिन्दी और मेरा आलाप: व्यंग्य (ब्रजेश कानूनगो)

सब जानते हैं कि हिन्दी रोजगार की कोई गारंटी नही देती, अन्य कोई भाषा भी नही देती लेकिन यह भी सत्य है कि  अंग्रेजी के ज्ञान के बगैर नौकरी नही मिलती। मीटिंगों-पार्टियों में हिन्दी में बातचीत नही होती। मॉल और होटलो... Read More...

जयति जय जय , जयति भारत: कविता (संध्या नवोदिता)

भारतीय सेना द्वारा इंसानियत के दुश्मनों के खिलाफ अंजाम दिए गए बहादुरी के कारनामे से हम सभी न केबल गद-गद हैं बल्कि ‘जयति भारत’ की गूँज हमारे मन में उठ रही है और हमारे कानों को सुनाई भी दे रही है | और शायद यही सम... Read More...
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बादल, एवं हवा…: ग़ज़ल (उपेन्द्र परवाज़)

कालिदास ने सिर्फ बादलों को दूत के रूप में लिखा | यहाँ  प्राकृतिक सौन्दर्य  के विभिन्न रूपों को मानव दूत के लिए प्रतीकात्मक प्रयोग कालिदास की रचना मेघदूतम से प्रेरित प्रतीत होता है, 'उपेन्द्र परवाज़' कालिदास की इ... Read More...

नो हार्ड शोल्डर फॉर फोर हंड्रेड यार्ड्स: यात्रावृतांत ‘लंदन, यूरोप’

बहुत कम लोग यात्रा वृत्तांत को ज़रिया बनाकर किसी दुसरे और दूर के भूभाग वहाँ की आर्थिक, राजनैतिक, सामाजिक स्थितियां-परिस्थितियाँ बेहद पठनीय और रोचक अंदाज़ में लिख और बयाँ कर पाते हैं | वागर्थ के संपादक 'एकांत श्... Read More...

‘चाँद की आँखों में’ एवं अन्य कवितायें : (तरसेम कौर)

जीविका की जद्दो-जहद में  लगातार क्षीण होती हमारी संवेदनाएं , अपना जीना भूलकर दूसरों के  जीवन को ही अपना जीना समझने की स्त्री मन की कोमलता, प्राकृतिक और वास्तविक रंगों के साथ जिन्दगी की कला को समझने की कोशिश करत... Read More...

गाँधी : संकल्प, शक्ति और अर्थवत्ता (डॉ मोहसिन खान)

वर्तमान में हम भारत को देखें तो ग्रामों के विकास की अवस्था और दुर्दशा स्पष्ट हो जाती है। आज भी कई गांवों में पानी पीने की असुविधा के साथ बिजली, विद्यालय और स्वास्थ्य केन्द्रों का अभाव है। भारत का आज़ादी के बाद अ... Read More...

ढूंढ सके तो ढूंढ

एक सप्ताह बाद जैसे ही दूरदर्शन पर  रामायण धारावाहिक  शुरू हुआ, हमारा पूरा परिवार आंखें गड़ाए, साधुरामजी को  उसमें  शॉट दर शॉट खोजने लगा।  महाबली रावण  रथ पर सवार हुआ।  'जय लंकेश!' के घोष के साथ  लंका का पश्चिमी... Read More...

क्या कला को सीमाओं में बाँधना आदर्श स्थिति होगी ?: आलेख (अभिषेक प्रकाश)

"सभी माध्यमों के इतर दिलों को जोड़ने वाला माध्यम गिने-चुने हैं। कला ,उसमें सबसे सशक्त माध्यम है जो दिलों को छू जाती है। अभी जनमाष्टमी पर अबू मोहम्मद औऱ फरीद अय्याज की आवाज मे 'कन्हैया, याद है कुछ भी हमारी' कव्वा... Read More...