इश्क़ वाला दिन: एवं अन्य कवितायेँ (सीमा आरिफ)

बाज़ारी प्रोपेगंडों से दूर इंसानी ह्रदय में स्पंदन करतीं मानवीय संवेदनाओं में प्रेम की तलाश करतीं 'सीमा आरिफ' की कवितायेँ .. इश्क़ वाला दिन इस मुहब्बत के दिन मैंने यह कविता तुम्हारे वास्ते भीड़ से खचाखच भरी ब... Read More...

आदर्श समाज की परिकल्पना-संत रैदास: आलेख (शिवप्रकाश त्रिपाठी)

रविदास ने ऐसे समाज की परिकल्पना की जिसमें कोई ऊंच-नीच, भेदभाव, राग-द्वेष न हो। सभी बराबर हो सामाजिक कुरीतियों न हो, जिसे कालान्तर में महात्मा गांधी द्वारा रामराज्य की अवधारणा के रुप में महत्व मिला। संत रैदास के... Read More...

गुस्से की गूँज: व्यंग्य (ब्रजेश कानूनगो)

यद्यपि गुस्से को पी जाने का सटीक फार्मूला हमारे संत महात्मा बहुत पहले से बता गए हैं लेकिन अब ऐसा सम्भव नही रह गया है, क्योंकि पीने के लिए अब बहुत सी चीजें उपलब्ध हैं।  गुस्सा पीना पिछडा हुआ और अप्रासंगिक तरीका ... Read More...

विज्ञान और कला का समागम, विज्ञान प्रदर्शनी: रिपोर्ट (अनिता)

"अब मैं उस बच्चे के प्रोजेक्ट के पास खडी थी जिसका नाम था “जीवन में गणित की भूमिका” (role of  mathemathics in life ) मेरे बिना पूछे ही इन छात्रों ने अपना परिचय आठवी कक्षा के आकाश और अंजली के रूप में दिया | ये दो... Read More...

प्रेम एवम् विद्रोह के बीच खड़े मनोहर श्याम जोशी: आलेख (आशीष जयसवाल)

सभ्यता के विकास के साथ ही प्रेम और युद्ध से सम्बन्धित किस्से कहानियां प्रचलित होने लगी थीं ! प्रेम और युद्ध मानव मन को आकर्षित करतें हैं यही कारण है की प्रेम  और युद्ध से सम्बन्धित  किस्से कहानियां आज भी लिखे ज... Read More...

समकालीन हिंदी उपन्यास और आदिवासी जीवन: आलेख (कृष्ण कुमार)

21वीं सदी में जब भूमण्डलीकरण, औद्योगीकरण अपने चरम पर है तथा विकास के नाम पर आदिवासी समुदाय को उसके मूलभूत आवश्यकताओं जल, जंगल, जमीन’ से बेदखल किया जा रहा ऐसे में संकट केवल उनके अस्तित्व पर ही नहीं उनकी संस्कृति... Read More...

बिटिया बड़ी हो गयी: कहानी (डॉ0 नंदलाल भारती)

"नरोत्तम- मुसीबत के माहौल में पले-बढ़े। मेरी भी नौकरी का कोई भरोसा नही था, मैं जातीय अयोग्यता की वजह से उत्पीड़न का शिकार हो चुका था । अपने तो खैर कोई शहर में थे नही । ये कामप्रसाद दूर गांव के सजातीय मिल गये थे। ... Read More...

कल कहां जाओगी: ऑडियो कहानी (आवाज़, ममता सिंह)

    जन्म : 17 अप्रैल 1940, पुरमण्डल (जम्मू)भाषा : हिंदीविधाएँ : उपन्यास, कविता, कहानीमुख्य कृतियाँकविता संग्रह : मेरी कविता मेरे गीत, तवी ते झन्हां, न्हैरियां गलियां, पोटा पोटा निम्बल उत्तर ब... Read More...

टू वीमेन: युद्ध काल में स्त्री: आलेख (प्रो0 विजय शर्मा)

''युद्ध का स्त्री पर पड़ने वाले प्रभाव को दिखाने वाली अच्छी फ़िल्मों की संख्या और भी कम है। ‘टू वीमेन’ उन्हीं कुछ बहुत अच्छी फ़िल्मों से एक है। ‘टू वीमेन' उपन्यास युद्ध काल में स्त्री जीवन की विभीषिका का सचित्र, उ... Read More...

उसका प्रेमी: एवं अन्य कवितायेँ (प्रेमा झा)

कविता के अंतर्मन में झांकते शब्दों से प्रेम को परिभाषित करतीं 'प्रेमा झा' की कविताएँ ......| उसका प्रेमी  प्रेमा झा तस्वीर का आगाज़ जाने कब हुआ तब जब आइना भी नहीं खोजा गया था! खुद को भी न पहचानता वो शख्... Read More...