दादा साहेब फ़ाल्के: भारतीय सिनेमा के अमिट हस्ताक्षर (एस तौहीद शहबाज़)

फ़ाल्के के जीवन मे फ़िल्म निर्माण से जुडा रचनात्मक मोड सन 1910 ‘लाईफ़ आफ़ क्राईस्ट’ फ़िल्म को देखने के बाद आया, उन्होने यह फ़िल्म दिसंबर के आस-पास ‘वाटसन’ होटल मे देखी | वह फ़िल्म अनुभव से बहुत आंदोलित हुए और इसके बाद... Read More...

अब और नहीं: कहानी (फिरोज अख्तर)

चांद आज बहुत सुस्त लग रहा था। किसी की गोद में नहीं जा रहा था। आज ज्यादा ही छिरिया रहा था। मां की छाती से लगकर थोड़ी देर के लिए चुप हो जाता फिर रोने लगता। शाम होते ही उसका बदन गर्म होने लगा। रात में तबियत बिगड़ने ... Read More...

‘गांधी ने कहा था’: नाट्य समीक्षा (एस तौहीद शहबाज़)

साम्प्रदायिकता का ख़बर बन जाना ख़तरनाक नहीं है, ख़तरनाक है ख़बरों का साम्प्रदायिक बन जाना। देश में विभिन्न समुदायों में तमाम तनावों और असहज हालातों के बीच राजेश कुमार का नाटक ‘गांधी ने कहा था’ हमेशा प्रासंगिक र... Read More...

बहिष्कारी तिरस्कारी व्यापारी : व्यंग्य (आरिफा एविस)

भारत एक त्यौहारों वाला देश है तब ऐसे सीजन में त्यौहारी वक्तव्यों का सीजन न हो ऐसे कैसे हो सकता है? यूँ तो हमें किसी बात से गुरेज नहीं लेकिन कोई अगर हमारे दुश्मन की तरफदारी करेगा तो उसका बहिष्कार करना जरूरी है. ... Read More...

एक चिनगारी घर को जला देती है: कहानी (तोलिस्तोय )

साहित्यिक संग्रह से 'तोल्सतोय' की कहानी ........ अनुवाद 'प्रेमचंद की' कलम से......|  एक चिनगारी घर को जला देती है  प्रमचंद -: अनुवाद - प्रेमचंद :- एक समय एक गांव में रहीम खां नामक एक मालदार किसान रहता था। ... Read More...

प्यास…. : कविता (शबाना)

मानव जीवन के चिंतन से गुज़रती संवेदनशील कविता बुनने का सार्थक प्रयास 'शबाना' की कलम से ........ प्यास....   शबाना पेन्सिल मिली, पैन मिला। एक कागज़ कहीं से ढूंढ लिया लिखने को मन विचलित हुआ पांच-दस मिनट ... Read More...

काला – हीरा: कविता (अशोक कुमार)

कोल इंडिया में कार्यरत 'अशोक कुमार' की कविताएँ कोयले की कालिख के भीतर से झांकती धवल जीवन की लालसाएं एवं इंसानी जिजीविसा की ज़िंदा तस्वीरें हैं .......| - संपादक  काला - हीरा ( बचपन में )   अशोक कुमार कोय... Read More...

पतंग पर सवार : रेखाचित्र (अशोक कुमार तिवारी)

हमेशा ही सामान्य या सहिष्णु दिखने वाली स्थितियां प्राकृतिक रूप से सामान्य नहीं होतीं अपितु किसी अनचाहे डर और कथित अनुसाशन भी उनके यथार्थ या असामान्य, असहिष्णुता जैसी स्थितियों को किसी आवरण की तरह ढांके रहता है ... Read More...

अशोक कुमार पांडेय, की कवितायें

इधर हमारे आसपास किसी न किसी मुद्दे पर अभिव्यक्ति की आज़ादी पर लगातार हमले देखे गए हैं। हमारे जीवन में  ऐसे हालात बार-बार सामने आते रहे हैं कि हम जनगीतों की सामाजिक जरूरत समझें .....। प्रतिरोध का यही रचनात्मक नज... Read More...

मेरी कविताएँ ही मेरा परिचय है: एवं अन्य कवितायें (तेजप्रताप नारायण)

जिंदगी के कठोर सच, संघर्ष एवं मानवीय उम्मीदों पर गहराते अंधेरों को बेबाकी से बयाँ करतीं 'तेज प्रताप नारायण' की कविताएँ .........| - संपादक मेरी कविताएँ ही मेरा परिचय है   तेजप्रताप नारायण मैं मेरा परिचय... Read More...