धोखा, माँ एवं अन्य गज़लें : दिलशाद सैदानपुरी

रंग मंच कि दुनिया में प्रवेश करने से पहले आपने 'दिलशाद सैदानपुरी' के नाम से गज़लें लिखना शुरू किया और यह लेखन का सफ़र आज भी जारी है | हमरंग के मंच से कुछ गज़लें आप सभी पाठकों के लिए, हमरंग पर आगे भी यह सफ़र जारी रह... Read More...

रोती हुई संवेदनाओं की आत्मकथा : आशीष जायसवाल

एक बेहतर और सराहनीय प्रयास आशीष जायसवाल का – संपादक रोती हुई संवेदनाओं की आत्मकथा <img class="size-full wp-image-2458" src="http://www.humrang.com/wp-content/uploads/2016/09/Ashish avis ... Read More...

सारे दृश्य बदल रहे हैं….: आलेख (नीलाभ अश्क़)

युवा कविता का समालोचना के साथ जायजा लेने का प्रयास कर रहे हैं नीलाभ अश्क | उनकी इस अंतर्दृष्टिय कविता यात्रा में कविता के स्वरुप, सम्प्रेषण, संवेदनशीलता और कविता के साथ रचना के साहित्यिक, सामाजिक सरोकारों की गह... Read More...

सुबह ऐसे आती है: कविता (निर्मल गुप्ता)

सच के धरातल पर आकार लेती मानवीय अभिव्यक्ति की एक कविता........ सुबह ऐसे आती है  पुजारी आते हैं नहा धोकर अपने अपने मंदिरों में जब रात घिरी होती है। वे जल्दी जल्दी कराते हैं अपने इष्ट देवताओं को स्नान इसके... Read More...

‘तरसेम कौर’ की तीन कविताएँ

कविता लिखी नहीं जाती शायद वह बनती है, सजती है भीतर कहीं गहरे मन के अंतस में, और रिस पड़ती है शब्दों की बुनावट लेकर, कुछ ऐसे ही एहसास से भरतीं हैं 'तररसेम कौर' की कविताएँ ...................... १-   तरसेम कौ... Read More...

दो दिलचस्प उबाऊ किताबें : आलेख (उज्जवल भट्टाचार्य)

दो दिलचस्प उबाऊ किताबें  बर्लिन दीवार गिरने के बाद एक मुहावरा बन गई. अब भी इसके इस्तेमाल की कोशिश जारी है. यहां तक तो ठीक था, लेकिन पूंजीवाद की इस सनसनीख़ेज़ जीत को सैद्धांतिक आधार देना था – ऐसा आधार जिसका ... Read More...

सुसाइड नोट: ‘बस मरना ही हमारे हिस्से है.. (विनय सुल्तान)

सुसाइड नोट: ‘बस मरना ही हमारे हिस्से है.. साभार गूगल (तीसरी क़िस्त) हमारे जेहन में हर शब्द के साथ एक या अधिक छवियां जुड़ी होती हैं. मसलन बुंदेलखंड नाम सुनते ही लक्ष्मी बाई, फूलन देवी, ददुआ, मोड़ा-मोड़ी, चंद्रपाल-द... Read More...

सेक्सुअल शोषण की काली हकीक़त, ‘कहानी २’ आलेख (सैयद एस तौहीद)

सेक्सुअल शोषण की काली हकीक़त, 'कहानी २'  एस तौहीद शहबाज़ शोषण के हर रुप का विरोध ज़रूरी है. यह किसी भी रुप में मौजूद हो सकता है.सुजॉय घोष की हालिया 'कहानी 2 दुर्गा रानी सिंह' इसी बात को रेखांकित करती है.सेक्सु... Read More...

जेनेरेशन गैप और प्रकाश : लघु कथाएं (निधि जैन)

एक जेनेरेशन गैप निधि जैन हमारा ज़माना "अम्मा... अम्मा..मैं पास हो गया" "तो का करूँ हो गया पास तो..अब फिर जान खायेगा..नई किताबें मांगेगा..चल अब छुट्टियों में बापू के साथ काम पर जइयो तभी किताबें मिलेंगी.." ... Read More...

उस रात : लघु कथा (सुशील कुमार भारद्वाज)

लघु कहानी के नए हस्ताक्षर के रूप में उभरते 'सुशील कुमार भारद्वाज' की कलम से मानवीय अंतरद्वंद को उकेरती उनकी अगली लघुकथा हमरंग के मंच से आप सब के बीच ........| - संपादक  उस रात उस रात दिल और दिमाग दोनों में ... Read More...