उस रात : लघु कथा (सुशील कुमार भारद्वाज)

लघु कहानी के नए हस्ताक्षर के रूप में उभरते 'सुशील कुमार भारद्वाज' की कलम से मानवीय अंतरद्वंद को उकेरती उनकी अगली लघुकथा हमरंग के मंच से आप सब के बीच ........| - संपादक  उस रात उस रात दिल और दिमाग दोनों में ... Read More...

आईए ‘नक्शाब जारचवी’ को जाने : आलेख (सैयद एस तौहीद)

आज फिल्मउद्योग में बाजारी प्रभाव और नित नए उगते चहरों कि भीड़ में गुम होते और हो चुके कई नामों में शामिल है बुलंद शहर में जन्मे  गीतकार  'नक्शाब जारचवी' का नाम विसरे हुए इसी फनकार कि कुछ यादें ताज़ा करा रहे हैं '... Read More...

एक बिटिया की मनोव्यथा…: कविता (तरसेम कौर)

नए लेखकों को बेहतर मंच प्रदान करना भी हमरंग के उद्देश्यों में शामिल है | इसी पहल के साथ अब तक हमरंग एक नहीं कई नव लेखकों की रचनाएं प्रकाशित कर उन्हें प्रोत्साहित कर चुका है और उनकी कलम निरंतर चल रही है  | आज इस... Read More...

बायपास के पास : व्यंग्य (ब्रजेश कानूनगो)

‘लेकिन यहाँ पोहे-जलेबी नहीं है..दोस्त नहीं हैं.. गांधी चौराहे का धरना प्रदर्शन नहीं है..लायब्रेरी नहीं है..गोष्ठी नहीं है..कविता नहीं है...इनके बगैर मैं अकेला महसूस करता हूँ यहाँ..!’ साधुराम जी बोले. ‘तो आप दिन... Read More...

मैं भी आती हूं ….! कहानी (हनीफ मदार)

वर्तमान समय की  उपभोगातावादी व्यवस्था के कारण  हरी भरी भूमि और  पेड़ों को काटकर ईट पत्थर की चन्द दीवारों द्वारा बने मकानों के दर्द को बयाँ करती है  हनीफ मदार की कहानी  ' मैं भी आती हूँ ..... ' जिसमें धर्म के आगे... Read More...

रंगमंच में अनुदान का ऑडिट कराया जाए : आलेख (अनीश अंकुर)

‘‘थियेटर में ग्रांट देने का काम एन.एस.डी को सौंप दिया गया है। बहुत सारे लोग परेशान हैं कि अब तो सारा अनुदान एन.एस.डी के लोगों को ही मिलने वाला है,.... उनकी चिंता जायज है। पीछे के आंकड़ों और रंगमहोत्सव इसका जीता-... Read More...

वो हाथ…एवं अन्य कविताएँ (अशोक तिवारी)

इंसान होने के एहसासात के साथ संवेदनाओं को छूती हुई अशोक तिवारी  कविताएँ ......... संपादक  वो हाथ... अशोक कुमार तिवारी काम करते वो हाथ जो हों किसी भी देश में किसी भी मिट्टी से जुड़े हों उनके सरोकार जो र... Read More...

‘सीमा आरिफ’ की कवितायें

प्रेम के सूक्ष्म एहसासों और जीवन कि तरह ज़िंदा यादों के फाहों से मानवीय संवेदना कि परतों को बिना आवाज़ खोलने का प्रयास करतीं ‘सीमा आरिफ‘ की  कविताएँ ………..| – संपादक  १- <img... Read More...

शो मस्ट गो ऑन, ‘सुखिया मर गया भूख से’: रिपोर्ट (अनीता चौधरी)

शो मस्ट गो ऑन, 'सुखिया मर गया भूख से' अनीता चौधरी शौकिया रंगमंच का विस्तार हो रहा है! पर वो अपने आप को संकटग्रस्त पाता है। वजह।?...उसे कम खर्च और सशक्त कथ्य के ताज़े नाटक चाहिए होते हैं नाटककार, रंगकर्मी जन ... Read More...

”रवीन्द्र के. दास का एकल कविता-पाठ”

''रवीन्द्र के. दास का एकल कविता-पाठ'' साभार गूगल 'स्त्रीवादी भजन'' पाँच मर्दों ने मिलकर स्त्रीवादी भजन गाए दर्शकों में बैठी स्त्रियाँ मुस्कुराईं इस तरह हुआ स्त्रीवादी कविता का प्रदर्शन कुछ मर्द होत... Read More...