परले ज़माने का राजा: कविता (सूरज बडात्या)

हिंदी कविता में प्रखर राजनितिक चेतना और वैज्ञानिक सोच के धनी सूरज बडत्या की कवितायें समय-सापेक्ष हैं और हस्तक्षेप करती हैं अपने समय की चुनौतियों से---संपादक परले ज़माने का राजा !  एक  परले ज़माने की बात है .... Read More...

साइकिल की सैर : लघु कथा (बाबा मायाराम )

हर व्यक्ति के दिमाग की हार्ड डिस्क में बचपन की अनेक स्मृतियाँ अंकित होती हैं, जब भी इस बाजारी भाग दौड़ से थककर थोड़े फुर्सत के पल मिलते है तो हम उन यादों में खो जाते हैं और ये यादों हमें अन्दर ही अन्दर गुदगुदाने ... Read More...

जीव अनन्त है, मात्र जीवनकाल ही सीमित है: “ए० के० हंगल”

अविभाजित भारत के सियालकोट (जो कि अब पाकिस्तान में है) में साल 1917 में जन्मे अवतार विनीत कृष्ण हंगल उर्फ ए. के. हंगल की शुरूआती जिंदगी, काफी हंगामेदार रही। उनका बचपन और पूरी जवानी संघर्षमय गुजरी। अपने स्कूली दि... Read More...

घंटा बुद्धिजीवी : व्यंग्य (अनीता मिश्रा )

"अगर कोई स्त्री इन्हें गलती से भी पोजिटिव रिस्पोंस दे देती है तो इनके मन में मंदिर की सामूहिक आरती के समय बजने वाले हजारों घंटे बजने लगते हैं . ये उसको समझाते हैं कि नारी मुक्ति का रास्ता देह से होकर जाता है इस... Read More...

वर्तमान समय में अनुवाद की उपादेयता, मुदस्सिर अहमद भट्ट

भारतीय साहित्य का इतिहास विश्व भर में सर्वाधिक प्राचीन, प्रौढ़ और कालमय हैं। साहित्यिक आदान- प्रदान तथा राष्ट्रीय चेतना को विकास के लिए भी अनुवाद एक सशक्त उपादान है। आदान- प्रदान की प्रक्रिया जीवन के सभी क्षेत्र... Read More...

कृश्न चंदर: कड़वी हकीकत का सच्चा अफसानानिगार (जाहिद खान)

"24 नवम्बर, 1914 को अविभाजित भारत के वजीराबाद, जिला गूजरांवाला में जन्मे कृश्न चंदर ने 1936 से ही उन्होंने लिखना शुरू कर दिया था। शफीक अहमद, जो उर्दू पत्रिका ‘इंकलाब’ में एक स्तंभकार थे, उनके लेखन का कृश्न चंदर... Read More...

अनीता चौधरी की तीन कविताएँ….

इंसान के दुनिया में आने के साथ ही प्रेम दुनिया में आया और भाषा के बनने के साथ ही प्रेम की रचनात्मक अभिव्यक्ति कविता भी किन्तु साहित्य में कविताई प्रेम अभिव्यक्ति करती रचनाएं इंसानी और सामाजिक सरोकारों से भी विम... Read More...

‘आधा गांव’ का सम्पूर्ण दृष्टा, ‘राही’ साक्षात्कार (एम् फीरोज खान)

उर्दू अदब से शुरू होकर हिंदी साहित्य में बड़ा दख़ल रखने वाले 'राही मासूम रज़ा' के व्यक्तित्व और जीवन संघर्षों का परिचायक खुद उनका विपुल साहित्य है बावजूद इसके आपका नाम और साहित्यिक रचनाएं हमेशा चर्चाओं में रहे हैं... Read More...

कहना सुनना: कहानी हिंदी में (कुमार अम्बुज) ( kahani in hindi )

मानवीय रिश्तों की गर्माहट को भेदती छद्म आज़ादी से होकर किसी बारीक रेशे की तरह गुजरती जिंदगी के बेहद सूक्ष्म कणों को पकड़ने, जोड़ने का प्रयास करती कवि 'कुमार अम्बुज' की यह कहानी .....| - संपादक  कहना सुनना  कु... Read More...

धन कभी काला होता है क्या ? व्यंग्य (नित्यानंद गायेन)

धन कभी काला होता है क्या ?  नित्यानंद गायेन पिछले कई दिनों से मैं अपनी प्रेमिका से दूर होने के गम में एकदम देवदास बना हुआ था | ऊपर से ये बेईमान मौसम मुझे और भी उदास बना दे रहा है था | तो सोचा चलो आज संडे है ... Read More...