क्रोध का प्रबंधन, एवं अन्य कविता (रूपाली सिन्हा)

वक्ती हालातों, ज़ज्बातों और संवेदनाओं को शब्दों के सहारे कविता में पिरोने का सार्थक प्रयास करतीं 'रूपाली सिन्हा' की दो कविताएँ .......| - संपादक  क्रोध का प्रबंधन  प्रबंधन के इस युग में सिखाया जा रहा है क्रो... Read More...

जो डूबा सो हुआ पार…: आलेख (अनीता मिश्रा)

''क़ैद बन जाए मुहब्बत तो मुहब्बत से निकल'', या ''ज़न्नत एक और हैं, जो मर्द के पहलू में नहीं..'' आमतौर पर लोग प्रेम के मायने बंधना या बांधना समझते हैं। लेकिन एक स्त्री और पुरुष के बीच का प्रेम फैसला लेने की एक आज... Read More...

शम्भू मित्र ने रंगमंच में आधुनिक युग का प्रारंभ किया, अनीश अंकुर

शम्भू मित्र ने रंगमंच में आधुनिक युग का प्रारंभ किया अनीश अंकुर "शम्भू मित्र ने आम लोगों के दुःख-दर्द को तो अभियक्त किया ही लेकिन उनके द्वारा निर्देशित 'नवान्न' ने नाटकों की दुनिया में नए युग का पदार्पण किया... Read More...

सामाजिक परिवर्तन के अंतर्द्वंदऔर आधा गाँव: शोध आलेख

प्रयोगधर्मी साहित्यकार राही मासूम रजा़ ने अपनी लेखनी द्वारा बदलते सामाजिक परिवेश को बहुत ही सूक्ष्मता से शब्दबद्ध किया है। आज से ठीक 50 वर्ष पूर्व सन् 1966 में लिखा गया ‘आधा गाँव’ उपन्यास राही की प्रतिनिधि रचना... Read More...

मेरा मूल नाम कुछ और है…: ‘सलोनी किन्नर’ साक्षात्कार

"हर व्यक्ति की तरह है हम किन्नरों के भी अपने नियम बनाएं हुए है और उनका पालन करना पड़ता है। जैसे रोजमर्रा का काम, नहाना-धोना, पूजा -पाठ करना, मंदिर जाना आदि काम प्रमुख है । पर एक दर्द-सा दिल में हमेशा रहता है कि ... Read More...