भविष्य की मौत: एवं अन्य कविताएँ (दामिनी यादव)

जहाँ वर्तमान जब मौजूदा प्रतीकों के साथ असल रूप में संवेदनाओं के धरातल पर रचनात्मक दस्तक देता है तब कोई कविता महज़ एक रचना या लेखकीय कृति भर नहीं रह जाती बल्कि वह एक स्वस्थ संवाद की ताजगी के साथ उतरती है समाज की ... Read More...

भक्ति आन्दोलन और काव्य: समीक्षा (आशीष जायसवाल)

‘सूर की कविता  का समाज’ और ‘मीरा के काव्य में सामाजिक पहलू’ दो ऐसे महत्वपूर्ण कवियों के विषय में लिखा गया लेख है जो प्रायः हिन्दी साहित्य के आलोचकों के उतने प्रिय विषय नहीं रहें है एवम् इनकी काव्यों में सामाजिक... Read More...

कश्मीर : एक संक्षिप्त इतिहास: ‘दूसरी क़िस्त’ (अशोक कुमार पाण्डेय)

कश्मीर के ऐतिहासिक दस्तावेजों और संदर्भों से शोध-दृष्टि के साथ गुज़रते हुए “अशोक कुमार पाण्डेय”  द्वारा लिखा गया ‘कश्मीर : एक संक्षिप्त इतिहास’ आलेख की दूसरी क़िस्त आज पढ़ते हैं | – संपादक  "1128 ईसवी में गद्दीनश... Read More...

रचनात्मक हस्तक्षेप का ‘जुटान’: रिपोर्ट (मज्कूर आलम)

रचनात्मक हस्तक्षेप का 'जुटान'  मज्कूर आलम 25 अप्रैल को नई दिल्ली के गांधी शांति प्रतिष्ठान के सभागार में साहित्यिक संस्था ‘जुटान’ का पहला राष्ट्रीय सम्मेलन हुआ। इस सम्मेलन में देशभर के आंदोलनकर्मी और साहित्य... Read More...

समकालीन साहित्य में मुस्लिम महिला साहित्यकार: आलेख (अनीश कुमार)

स्त्री को अपनी परंपरा, अपना संघर्ष और अपनी भागीदारी का इतिहास खुद लिखना होगा । स्त्री जानती है भिन्न-भिन्न वर्गों, वर्णों और जातियों के बीच नए-नए समीकरणों के साथ उसे अपने लिए लड़ना होगा । पूंजीवादी पितृसत्ता ऊपर... Read More...

मेरा रुझान विजुअल आर्ट और लेखन दोनों के प्रति रहा है: “असग़र वजाहत” साक्षात्कार

अपनी किताब ‘असग़र वजाहत –चुनी हुई कहानियां' के पर एक चर्चा के लिए कानपुर आये लेखक डाक्टर असग़र वजाहत | वैसे कानपुर शहर उनके लिए अजनबी नहीं है । ननिहाल होने के नाते उनके ताल्लुक के तार यहाँ के एक मोहल्ले राम नाराय... Read More...

आखिर युद्ध की परिणति…? आलेख (रामजी तिवारी)

फ्रेंच राष्ट्रपति ‘ओलांद’ के इस वक्तव्य का क्या अर्थ है कि “अब हम दयारहित आक्रमण करेंगे |” क्या उस दयारहित आक्रमण का निशाना सिर्फ आइएसआइएस पर ही होगा, या कि उस इलाके की सामान्य जनता पर भी | या कि ‘कोलैट्रेल डैम... Read More...

गंभीर नाटकों की कमी को भरता ‘न हन्यते’: आलेख (अभिनव सव्यसांची)

12 अक्टूबर 2015 को जवाहरलाल नेहरु विश्वविद्यालय के कन्वेंशन सेंटर में 'संसप्तक' की नाट्य प्रस्तुति ‘ना हन्यते’ का समीक्षात्मक विवेचन कर रहे हैं 'अभिनव सब्यसाची' जो पेशे से पत्रकार हैं और स्वयं भी 15 सालों से थि... Read More...

‘आल्हा’ शैली में लिखी गईं कुछ कवितायें: (शिव प्रकाश त्रिपाठी)

विभिन्न भारतीय कला संस्कृतियों में, पूर्वोत्तर भारतीय कला "आल्हा" लोक गायन में अपने छन्द विधान एवं गायन शैली की दृष्टि से विशिष्ट दिखाई पड़ती है । माना जाता रहा है कि इसे सुन कर निर्जीवों की नसों में भी रक्त संच... Read More...

अदृश्य दुभाषिया: एवं अन्य कविताएँ (अभिज्ञात)

अचेतन मानव तंतुओं को चेतन में लाने का प्रयास करतीं 'अभिज्ञात' की कवितायें ...... अदृश्य दुभाषिया  अभिज्ञात चिट्ठियां आती हैं आती रहती हैं कागजी बमों की तरह हताहत करने समूची संभावना के साथ कौन सा शब्... Read More...