ब-यादे रोहित वेमुला: स्मरण आलेख (जीवेश प्रभाकर)

"जाने कब समाज को बदल डालने की तमन्ना लिए एक युवा अचानक मानो हमारे मुंह पर थूकता हुआ दूसरे जहाँ को चला जाता है । मानो कह रहा हो कि तुम्हारी है तुम ही संभालो ये दुनिया । मगर हम हैं कि शर्म भी आती नहीं । आज राष्ट्... Read More...

हमारे समय के धड़कते जीवन की कविताएं: समीक्षा (डॉ० राकेश कुमार)

इक्कीसवीं सदी के दूसरे दशक के मध्यांतर में प्रदीप मिश्र की कविताएं तेजी से बदलते भारतीय समाज के विविध रंगों को हमारे सामने लाते हैं। वर्तमान समय में भारतीय समाज लोकतंत्र, भूमंडलीकरण, बाज़ारवाद और निजीकरण की बड़ी ... Read More...

बुरे दिनों के कलैण्डरों में: कविता (प्रदीप मिश्र)

के० पी० सिंह मेमोरियल चेरिटेबल ट्रस्ट द्वारा आयोजित 'मलखान सिंह सिसौदिया कविता पुरूस्कार' 2016 "प्रदीप मिश्र" को दिए जाने पर उन्हें हमरंग परिवार की बधाई के साथ......... आज , वक्ती हालातों से जूझते हुए बेहतर कल ... Read More...

स्त्री आंदोलन-इतिहास और वर्तमान: आलेख ‘पांचवीं क़िस्त’ (डॉ0 नमिता सिंह)

दरअसल मार्क्स ने वर्गीय आधार पर आधुनिक समाज में स्त्रियों के शोषण और उनकी निम्नतर स्थितियों के लिये बड़ी सीमा तक पूंजीवादी व्यवस्था को जिम्मेदार समझते हुए कहा कि स्त्रियों का संघर्ष चाहे वह परिवार में हो या कार... Read More...

रमणिका फांउडेशन और दलित लेखक संघ की काव्य-गोष्ठी: रिपोर्ट (सुमन कुमारी)

प्रत्येक माह के दूसरे शनिवार को रमणिका फांउडेशन और भारतीय दलित लेखक  संघ के संयुक्त तत्वाधान में काव्य-गोष्ठी का आयोजन किया जाता है। इस आयोजन में हर बार प्रत्येक विधा के लेखक, श्रोतागण, पत्रकार और बुध्दिजीवी शा... Read More...

जश्न-ए-रेख्ता 2016: रिपोर्ट (सीमा आरिफ)

जश्न-ए-रेख्ता जलसे का आयोजन पिछले दो सालों से दिल्ली में किया जा रहा है.इस बार इस कार्यक्रम का आयोजन 12-14 फरवरी २०१६ को इंदिरा गांधी राष्टीय कला केंद्र दिल्ली में किया गया. कार्यक्रम की एक संक्षिप्त रिपोर्ट 'स... Read More...

क्लासिकल फिल्मों का समागम : पटना फिल्म फेस्टिवल 2016: रिपोर्ट

लेकिन लंबे अरसे बाद शुरू हुए इस फिल्म समारोह की सबसे अच्छी बात यह रही कि भारतीय पैनोरमा की आठ भाषाओं की स्तरीय एवं क्लासिकल फिल्मों को देखने के लिए किसी को न तो रुपए खर्च करने पड़े न ही किसी पास का इंतज़ार. दर्शक... Read More...

एक गौभक्त से भेंट: व्यंग्य (हरिशंकर परसाई)

हरिशंकर परसाई हिंदी साहित्य जगत का एक ऐसा नाम जिसकी वज़ह से व्यंग्य को साहित्य विधा की पहचान मिली | परसाई ने सामाजिक रूप से हलके फुल्के मनोरंजन की सांस्कृतिक धारा को मानवीय सरोकारों के साथ व्यापक प्रश्नों से जोड़... Read More...

रफ़ी साहेब की दीवानगी: आलेख (सैयद एस तौहीद )

'रफ़ी साहेब को पहला फिल्मी ब्रेक श्याम सुंदर ने एक पंजाबी फ़िल्म मे दिया, फ़िर जी एम दुर्रानी की फ़िल्म में पहले हिन्दी गीत के लिए नौशाद ने पहल की. उस जमाने में हुश्नलाल भगतराम व गीतकार राजेन्द्र कृष्ण के साथ कुछ स... Read More...

गोजर: कहानी (प्रो० विजय शर्मा)

यूं तो कहानी बहुत पहले लिखी गई .... लेकिन आज पढ़ते हुए लगता है जैसे हम सब पूरा समाज असहाय गोजर (कांतर) बनता जा रहा है और ऊपर रखी अनचाही ईंट का वज़न लगातार बढ़ रहा है ....... ' विजय शर्मा' की कहानी  गोजर  विजय... Read More...