बंद ए सी कमरों में झांकते होरी, धनियाँ…, संपादकीय (हनीफ मदार)

"ऐसा नहीं कि वर्तमान यथास्थिति का विरोध या प्रतिकार आज नहीं है, बल्कि ज्यादा है | एकदम राजनीतिज्ञों की तरह | कुछ हो न हो, बदले न बदले लेकिन व्यवस्थाई यथास्थिति का विरोध करके व्यक्ति सुर्ख़ियों में तो रहता ही है ... Read More...

अमरपाल सिंह ‘आयुष्कर’ की पांच लघुकथाएं

आकार में छोटी ही सही लेकिन बड़ी बातों की तरफ इशारा करतीं, चलती-फिरती जिंदगियों की टकराहटों से पनपतीं लघुकथाएं ..... बुके  अमरपाल सिंह 'आयुष्कर ' चौराहे की लाल बत्ती पर रुकते ही , फूलों पर पड़ी मेरी नज़र को व... Read More...

कब्र का अजाब : लघु कथा (आरिफा एविस)

अब अम्मी जोया को क्या समझाती कि एक ख़ास उम्र के बाद लड़कियों में जिस्मानी बदलाव होता है जिसकी वजह से लड़कियां मस्जिद-मदरसों में नहीं जाया करतीं. औरतें तो वैसे भी नापाक होती हैं. और नापाक चीज खुदा को भी पसंद नहीं. ... Read More...

संत कबीर और आधुनिक हिन्दी काव्य: शोध आलेख (प्रमिला देवी)

'जननायक कबीर का प्रभाव साहित्य पर आज छह सौ वर्षो के बाद भी ज्यों का त्यों देखा जा सकता है । आज जब भी धरती के किसी कोने में मानवता लहूलुहान होती है, तो झट से हमें कबीर का पढ़ाया पाठ याद आ जाता है । टैगोर और गांधी... Read More...

यह नया साल: एवं अन्य कवितायेँ (अनुपम सिंह)

जहाँ एक तरफ नए साल के स्वागत के में पार्टियों और शोर-शराबों का आवेग है वहीँ वर्तमान सामाजिक और राजनैतिक बदलाव के बीच किसी कलैंडर की तरह बदलते और गुजरते वर्षों को युवा पीढ़ी खुद के भीतर बढती हताशा के रूप में देखन... Read More...

हमारे समय में कविता: रिपोर्ट (अन्तरिक्ष शर्मा)

हर वर्ष की भांति एक जनवरी २०१६ को कोवैलैंट ग्रुप ने अपना स्थापना दिवस अनूठे तथा रचनात्मक ढंग से उन युवा और किशोर प्रतिभाओं के साथ  मनाया |जिनकी सामाजिक, साहित्यिक और कलात्मक प्रतिभाएं किसी मंच के अभाव में मुखर ... Read More...

डर.. : कविता (अनिरुद्ध रंगकर्मी)

हमरंग हमेशा प्रतिवद्ध है उभरते नवांकुर रचनाकारों को मंच प्रदान करने के लिए | यहाँ हर उस रचनाकार का हमेशा स्वागत है जिसकी रचनाएँ आम जन मानस के सरोकारों के साथ रचनात्मकता ग्रहण करने को अग्रसर दिखाई देती हैं | हमर... Read More...

साहित्य में स्त्राी सर्जनात्मकता: ऐतिहासिक संदर्भ, “भाग १” आलेख (डॉ० नमिता सिंह)

आज स्त्री-लेखन साहित्यिक चर्चा में एक मुख्य विषय है। समकालीन स्त्री रचनाकारों ने ऐतिहासिक-सामाजिक विकास क्रम की स्थितियों में बड़ी सीमा तक संविधान-प्रदत्त बराबरी के अधिकारों का उपयोग करते हुए अभिव्यक्ति की स्वतं... Read More...

साहित्य में स्त्री सर्जनात्मकता: ऐतिहासिक संदर्भ: “भाग २” आलेख (डॉ० नमिता सिंह)

"आधुनिक ज्ञान एक शक्ति है। उससे लैस होकर पुरुष खुद को शक्तिशाली बनाना चाहते थे, और स्त्रियों को कमज़ोर ही रखना चाहते थे। अपने इस स्वार्थ को पुरुष सुधारकों ने राष्ट्रवाद के सिद्धांत के आवरण में पेश किया कि ब्रिटि... Read More...

साहित्य में स्त्री सर्जनात्मकता: ऐतिहासिक संदर्भ: “भाग ३” आलेख (डॉ० नमिता सिंह)

"उन्नीसवीं सदी के उत्तरार्ध और बीसवीं सदी के पूर्वाद्ध की अवधि में जिन भारतीय महिलाओं ने अपनी मेधा, विद्वत्ता और सामाजिक क्षेत्र में आंदोलनकारी व्यक्तित्व से समाज के बड़े हिस्से को प्रभावित किया तथा स्त्री स्वात... Read More...