इनाम और ओहदे लौटाने से क्या होगा ? : आलेख ( विष्णु खरे )

"आज जिस पतित अवस्था में वह है, उसके लिए स्वयं लेखक जिम्मेदार हैं, जो अकादेमी पुरस्कार और अन्य फायदों के लिए कभी चुप्पी, कभी मिलीभगत की रणनीति अख्तियार किए रहते हैं। नाम लेने से कोई लाभ नहीं, लेकिन आज जो लोग दाभ... Read More...

पुरस्कार वापसी का अर्थ : रिपोर्ट (मंडलेश डबराल)

पुरस्कार वापसी का अर्थ मंडलेश डबराल साहित्य अकादेमी ने अगर अगस्त में कन्नड़ वचन साहित्य के विद्वान् एमएम कलबुर्गी की बर्बर हत्या की कड़े शब्दों में निंदा की होती तो शायद नौबत यहाँ तक नहीं आती कि देश की इतनी सा... Read More...

जरूर देखा है : गजलें (दिलशाद सैदानपुरी)

रंग मंच कि दुनिया में प्रवेश करने से पहले आपने ‘दिलशाद सैदानपुरी’ के नाम से गज़लें लिखना शुरू किया और यह लेखन का सफ़र आज भी जारी है | हमरंग के मंच से कुछ गज़लें आप सभी पाठकों के लिए, हमरंग पर आगे भी यह सफ़र जारी रह... Read More...

आवाज दे कहां है…!: कहानी (गीताश्री)

वह अपने डर को काबू में रखने की कोशिश करती पर किशोर मन में जो डर की नींव पड़ी थी, उस पर इतनी बड़ी इमारत बन चुकी थी कि वह चाह कर भी उसे गिरा नहीं सकती थी. उसे गिराने के लिए साहस की सुनामी चाहिए थी, जो हो नहीं सकती ... Read More...

हिन्दी के प्रयोग में सोशल मीडिया की भूमिका : आलेख (ब्रजेश कानूनगो )

ऐसे में सोशल मीडिया अपने तमाम खतरों और अतिवादी प्रकृति के बावजूद भाषा विशेषकर हिन्दी और हिन्दी साहित्य के प्रसार में बहुत मददगार हो सकता है. हुआ भी है. थोड़े विवेक और समझदारी से किये इसके उपयोग से नए जमाने के नए... Read More...

अँधेरे की पाज़ेब: एवं अन्य कविताएँ (निदा नबाज़)

अतीत के गहरे जख्मों से रिसते दर्द पर भविष्य के सुखद मानवीय क्षणों का मरहम रखती, 'निदा नवाज़' की कविताएँ......|  अँधेरे की पाज़ेब निदा नबाज़ अँधेरे की पाज़ेब पहन आती है काली गहरी रात दादी माँ की कहानिय... Read More...

ज़ुल्म के गलियारों में : एवं अन्य कविताएँ (सीमा आरिफ)

वर्तमान के सामाजिक, राजनैतिक तंग हालातों के बीच भविष्य के मानवीय खतरों को देखने का प्रयास करती 'सीमा आरिफ़' की लेखकीय सामाजिक सरोकारी प्रतिबद्धता उनकी रचनाओं की तरह बेहद गहरी होती जान पड़ती है | इन गहराती आशंकाओं... Read More...

नई थैरेपी…: व्यंग्य (ब्रजेश कानूनगो)

'यह सब आपके  तथाकथित विकास का परिणाम है। विकास के  नाम पर पूरा शहर खोद रखा है।सड़कों पर गड्‌ढे ही गड्‌ढे हैं,पुरानी सड़कों की रिपेयरिंग भी मात्र दिखाने के  लिए ही होती है,कुछ  दिनों में ही सड़केँ  फिर उखड़ जाती ह... Read More...

इंतज़ार: कहानी (सुशील कुमार भारद्वाज)

आधुनिक तकनीक के साथ बदलते सामाजिक परिवेश में निश्छल कहे जाने वाले प्रेम ने भी अपना स्वरूप बदला है | महज़ मानवीय संवेदनाओं के रथ पर सवार रहने वाला प्रेम व्यावहारिक धरातल पर उतर कर जीवन यापन के लिए जैसे रोज़ी-रोटी ... Read More...

हाइकू : (अमन सिंह ‘चांदपुरी’)

युवा कलमकार 'अमन चांदपुरी' की कुछ 'हाइकू' रचनाएं हमरंग के माद्ध्य्म से हाइकू मर्मज्ञों के समक्ष ..... आपकी टिप्पणी की अपेक्षा ....| हाइकू अमन सिंह 'चांदपुरी' (1) गूँजी हैं चीखें शब्द-शब्द हैं मौन रोत... Read More...