सूरज प्रकाश

किस्‍से किताबों के: दूसरी क़िस्त (सूरज प्रकाश)

हमरंग पर सूरज प्रकाश द्वारा लिखित विशेष व्यन्ग्यालेख ‘किस्से किताबों के’ की दूसरी क़िस्त – किस्‍से किताबों के – किस्‍सा तीन इस बार का किस्‍सा मेरे बेटे अभिजित की जुबानी  अच्‍छी किताब ने पिटाई से बचा... Read More...
सूरज प्रकाश

किस्‍से “सूरज प्रकाश” के…

हमरंग पर सूरज प्रकाश द्वारा लिखित विशेष व्यन्ग्यालेख ‘किस्से किताबों के’ की तीसरी क़िस्त – किस्‍से किताबों के – किस्‍सा पाँच सूरज प्रकाश बिना किताबों वाला घर- ये किस्‍सा एक प्रसिद्ध बांग्‍ला उप... Read More...
सूरज प्रकाश

एक कमज़ोर लड़की की कहानी: कहानी (सूरज प्रकाश)

सूरज प्रकाश एक कमज़ोर लड़की की कहानी वे मेरी पहली फेसबुक मित्र थीं जो मुझसे रू ब रू मिल रही थीं। फेसबुक पर मेरी फ्रेंड लिस्‍ट पर बेशक काफी अरसे से थीं लेकिन उनसे चैटिंग कभी नहीं हुई थी। कभी उन... Read More...
‘मंटो का टाइपराइटर’ रोचक प्रसंग

‘मंटो का टाइपराइटर’ रोचक प्रसंग

कृशन चंदर जब  दिल्‍ली रेडियो में थे, तभी पहले मंटो और फिर अश्‍क भी रेडियो में आ गये थे। तीनों में गाढ़ी छनती थी। चुहलबाजी और छेड़छाड़ उनकी ज़िंदगी का ज़रूरी हिस्‍सा थे। रूठना मनाना चलता रहता था। कृशन चन्द... Read More...
आश्वस्त करती है !: (डा० विजय शर्मा) हमरंग का एक वर्ष पूरा होने पर देश भर के कई लेखकों से ‘हमरंग’ का साहित्यिक, वैचारिक मूल्यांकन करती टिपण्णी (लेख) हमें प्राप्त हुए हैं जो बिना किसी काट-छांट के, हर चौथे या पांचवें दिन प्रकाशित होंगे | हमारे इस प्रयास को लेकर हो सकता है आपकी भी कोई दृष्टि बनी हो तो नि-संकोच आप … सीमा आरिफ़ जन्म-10 दिसम्बर 1986 उत्तर प्रदेश ( ज़िला बिजनौर) जामिया मिल्लिया इस्लामिया दिल्ली से इतिहास में पोस्ट ग्रेजुएशन एवं जर्नलिज्म में डिप्लोमा PSBT की डॉक्यूमेंट्री फिल्म -"There is something in the Air" में अभिनय ( फिल्म 2011 में केरल फिल्म और कोरियन फिल्म फेस्टिवल द्वारा राष्ट्रीय फिल्म पुस्कार से सम्मानित) तीन वर्ष तक नवभारत टाइम्स ऑनलाइन में लेखन विभिन्न मैगज़ीन,न्यूज़ पेपर्,पोर्टल में लेखक के रूप में सक्रीय टिप्पणियां 10 months ago 2 “हमरंग” की टीम से एक खुशनुमा भेंट: (सीमा आरिफ़)

“हमरंग” की टीम से एक खुशनुमा भेंट: (सीमा आरिफ़)

हमरंग का एक वर्ष पूरा होने पर देश भर के कई लेखकों से ‘हमरंग’ का साहित्यिक, वैचारिक मूल्यांकन करती टिपण्णी (लेख) हमें प्राप्त हुए हैं जो बिना किसी काट-छांट के, हर चौथे या पांचवें दिन प्रकाशित होंगे | हमारे... Read More...
‘प्रदीप कान्त’ की दो ग़ज़लें:

‘प्रदीप कान्त’ की दो ग़ज़लें:

‘प्रदीप कान्त’ की दो ग़ज़लें  प्रदीप कांत अनुभूति, कविता कोश, रचना कोश, वर्तमान साहित्य, हरिगन्धा, जनसत्ता सहित्य वार्षिकी (2010), समावर्तन, बया, पाखी, कथादेश, इन्द्रपस्थ भारती, सम्यक, सहचर, अक्षर पर्व ... Read More...

ख़तरे में इस्लाम नहीं: एवं अन्य नज़्में (हबीब जालिब)

सदियों के रूप में गुजरते समय और देशों के रूप में धरती के हर हिस्से याने दुनिया भर में लेखकों कलाकारों ने सच बयानी की कीमत न केवल शारीरिक, मानसिक संत्रास झेलकर बल्कि अपनी जान देकर भी चुकाई है …. इनकी गवाहि... Read More...
“लिओ तोलिस्तोय” की कुछ लघु कथाएं (अनूदित)

“लिओ तोलिस्तोय” की कुछ लघु कथाएं (अनूदित)

छोटी किन्तु बड़े प्रतीक संदर्भ प्रस्तुत करतीं “लिओ तोलिस्तोय” की इन पांच कहानियों में  चार कहानियां ‘सुकेश साहनी’ द्वारा अनूदित हैं वहीँ पांचवीं कहानी का अनुवाद ‘प्रेमचंद’ ने किया है  |  दयामय की दया ... Read More...
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मर्द नहीं रोते: कहानी (सूरज प्रकाश)

मर्द नहीं रोते सूरज प्रकाश जन्म : 14 मार्च 1952, देहरादून (उत्तरांचल) भाषा : हिंदी, गुजराती, विधाएँ : उपन्यास, कहानी, व्यंग्य, अनुवाद कहानी संग्रह : अधूरी तस्वीर, छूटे हुए घर, साचा सर नामे (गुजराती... Read More...
एक छोटा-सा मजाक: कहानी (अंतोन चेख़व)

एक छोटा-सा मजाक: कहानी (अंतोन चेख़व)

मानव ह्रदय सी गतिमान, इंसानी संवेदना की इतनी सूक्ष्म नक्कासी ‘अंतोन चेख़व’ की कहानियों की वह ताकत है कि कथा पाठक से जुड़ती नहीं बल्कि ह्रदय की अनंत गहराइयों में उतरती जाती है …… ऐसी ही एक कहानी …| – संपादक ... Read More...