कुछ तो शर्म करो एवं अन्य कविता (अनीता चौधरी)

पूंजीवादी राजनैतिक महत्वाकांक्षाएं, अवसर और बाज़ार के प्रभाव में नई गढ़ी जातीं और बिकतीं प्रेम व्याख्याओं की  अनुसंधानिक प्रयोगशाला में निश्छल मानवीय प्रेम को तलाशती 'अनीता चौधरी' की दो कविताएँ ......| - संपादक  ... Read More...

अनीता चौधरी की तीन कविताएँ….

इंसान के दुनिया में आने के साथ ही प्रेम दुनिया में आया और भाषा के बनने के साथ ही प्रेम की रचनात्मक अभिव्यक्ति कविता भी किन्तु साहित्य में कविताई प्रेम अभिव्यक्ति करती रचनाएं इंसानी और सामाजिक सरोकारों से भी विम... Read More...

फेसबुक: नाटक (अनीता चौधरी)

अनीता चौधरी की कलम कविता, कहानी, नाटक जैसी साहित्य की महत्वपूर्ण विधाओं पर सक्रिय है इस कड़ी में आपका एक बाल नाटक ....|  फेसबुक  अनीता चौधरी दृश्य – 1 (घर का दृश्य, शाम का समय है | पिताजी ऑफिस से आते है औ... Read More...

रहिमन पानी राखिये…: संपादकीय (अनीता चौधरी)

रहिमन पानी राखिये...  अनीता चौधरी मनुष्य को जीवन जीने के लिए मुख्य रूप से तीन चीजों की जरुरत होती है हवा, पानी और भोजन | जिस तरह से हवा और भोजन के बिना जीवन की परिकल्पना नहीं की जा सकती उसी प्रकार पानी के बि... Read More...

शो मस्ट गो ऑन, ‘सुखिया मर गया भूख से’: रिपोर्ट (अनीता चौधरी)

शो मस्ट गो ऑन, 'सुखिया मर गया भूख से' अनीता चौधरी शौकिया रंगमंच का विस्तार हो रहा है! पर वो अपने आप को संकटग्रस्त पाता है। वजह।?...उसे कम खर्च और सशक्त कथ्य के ताज़े नाटक चाहिए होते हैं नाटककार, रंगकर्मी जन ... Read More...
मैं पीछे क्यों रहूँ

प्रेम-गली अति सांकरी…: संपादकीय (अनीता चौधरी)

प्रेम-गली अति सांकरी... बसंत और मधुमास से गुज़रते हुए दृष्टि, वर्तमान समय में राजनैतिक इच्छाशक्ति के चलते पूरे सामाजिक परिवेश में एक ख़ास तरह के बदलाव पर आकर ठहर जाती है | ऐसा महसूस होने लगा है कि चारों तरफ अतार... Read More...
मैं पीछे क्यों रहूँ

महावारी या महामारी: संपादकीय (अनीता चौधरी)

एक बात जो मुझे बचपन से लेकर आज तक मेरे ही घर में चुभती रही है, जब भी मुझे मासिक धर्म शुरू होता है मेरी माँ मुझे अपने पूजा वाले कमरे में नहीं जाने देती हैं। मुझे बहुत खराब लगता है । मैंने उन्हें बहुत समझाने की क... Read More...

मैं क्यों पीछे रहूं…: लघुकथा (अनीता चौधरी)

"पार्वती आज तो तू सुबह से ही भूखी-प्यासी रहकर अपने पति की लंबी उम्र की दुआ कर रही है |" तो वह तुरंत बोली, "अरे, बीबी जी तुमसे क्या छुपाना ! तुम्हें क्या लगता है, जो पति रोज रात को शराब पीकर मुझे पीटता है उसकी ल... Read More...
मैं पीछे क्यों रहूँ

स्त्री आत्मनिर्भर क्यों बने…?: संपादकीय (अनीता चौधरी)

स्त्री आत्मनिर्भर क्यों बने…?  अनीता चौधरी मेरे पड़ोस में रहने वाली बीस वर्षीय सुमन को उसके पति की दिमागी हालत ठीक न होने की वजह से ससुराल वालों ने घर से बाहर निकाल दिया है | वह पिछले करीब अठारह महीनों से अपन... Read More...
मैं पीछे क्यों रहूँ

हम तो ऐसे ही देखेंगे…..! संपादकीय आलेख (अनीता चौधरी)

हम तो ऐसे ही देखेंगे…..!  अनीता चौधरी बहुत दिनों बाद, कल एक मित्र से मुलाक़ात हुई | सरकारी नौकरी करते हैं तो काफी दिनों बाद ही मिलना-मिलाना हो पाता है| बोले, ‘क्या बताऊँ आजकल बहुत ही त्रस्त चल रहा हूँ | मेरे ... Read More...