मैं पीछे क्यों रहूँ

हम तो ऐसे ही देखेंगे…..! संपादकीय आलेख (अनीता चौधरी)

हम तो ऐसे ही देखेंगे…..!  अनीता चौधरी बहुत दिनों बाद, कल एक मित्र से मुलाक़ात हुई | सरकारी नौकरी करते हैं तो काफी दिनों बाद ही मिलना-मिलाना हो पाता है| बोले, ‘क्या बताऊँ आजकल बहुत ही त्रस्त चल रहा हूँ | मेरे ... Read More...
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फिर लौट आई कामिनी: कहानी (अनीता चौधरी)

सभ्यता एवं सभ्यता विकास की बराबर हिस्सेदार दुनिया की आधी आवादी को लेकर उसकी मुक्ति के साथ आधुनिक, शिक्षित और सभ्य समाज की परिभाषा गढ़ना हमें जितना आसान जान पड़ता है वहीँ वास्तविकता के धरातल पर उस मानसिकता क... Read More...
विज्ञान और कला का समागम, विज्ञान प्रदर्शनी: रिपोर्ट (अनिता)

विज्ञान और कला का समागम, विज्ञान प्रदर्शनी: रिपोर्ट (अनिता)

“अब मैं उस बच्चे के प्रोजेक्ट के पास खडी थी जिसका नाम था “जीवन में गणित की भूमिका” (role of  mathemathics in life ) मेरे बिना पूछे ही इन छात्रों ने अपना परिचय आठवी कक्षा के आकाश और अंजली के रूप में दिया |... Read More...
“प्रेमचंद से बातें”: रिपोर्ट (अनीता चौधरी)

“प्रेमचंद से बातें”: रिपोर्ट (अनीता चौधरी)

संकेत रंग टोली और कोवलेन्ट ग्रुप ने प्रेमचंद को उनके 135 वें जन्मदिवस पर लगभग ३ घंटे के कार्यक्रम में रचनात्मक तरीके से याद किया …..|  अनीता चौधरी “प्रेमचंद से बातें”   मुंशी प्रेमचंद के 1... Read More...

परवाज़: कहानी (अनीता चौधरी)

कहानी में सौन्दर्य या कलात्मक प्रतिबिम्बों की ही खोज को बेहतर कहानी का मानक मान कर किसी कहानी की प्रासंगिकता तय करना भी वक्ती तौर पर साहित्य में परम्परावादी होने जैसा ही है | तीब्र से तीब्रतम होते संचार औ... Read More...
साल्व ऑफ़ लव: कहानी (अनीता चौधरी)

साल्व ऑफ़ लव: कहानी (अनीता चौधरी)

बचपन से लेकर जीवनपरियन्त कितनी ही छोटी बड़ी घटनाएँ होती गुज़रती जाती हैं इन्हीं घटनाओं में से जीवंत मानवीय संवेदनाएं खोज निकालना ही लेखकीय जूनून या रचनात्मकता है | ऐसे ही लेखकीय दृष्टिकोण की परिचायक है ‘अनीता... Read More...