मुल्ला जी की गाय : व्यंग्य (अनीता मिश्रा)

टुन्ना पंडित को ये समस्या राम मंदिर जैसी बड़ी पेचीदा समस्या लगी इसलिए तत्काल एक पुड़िया निकाली.. मुहं में डाल कर बोले..मुल्ला जी समस्या बहुत कठिन है, वो भी आजकल के माहौल में...अब मोहल्ले की बात है तो कुछ तो करना ... Read More...

बंदिशों में ‘सोशल मीडिया की स्त्री’: आलेख (अनीता मिश्रा)

निसंकोच हमारे समय और सामज ने तरक्की के कई पायदान और चढ़ लिए हैं ! तब सहज ही यह सवाल मन में आ खड़ा होता है कि क्या तरक्की में संवेदना के स्तर पर मानसिक वैचारिकी का कोई पायदान भी हम चढ़ पाए हैं ? इसके अलावा क्या इन ... Read More...

मेरा रुझान विजुअल आर्ट और लेखन दोनों के प्रति रहा है: “असग़र वजाहत” साक्षात्कार

अपनी किताब ‘असग़र वजाहत –चुनी हुई कहानियां' के पर एक चर्चा के लिए कानपुर आये लेखक डाक्टर असग़र वजाहत | वैसे कानपुर शहर उनके लिए अजनबी नहीं है । ननिहाल होने के नाते उनके ताल्लुक के तार यहाँ के एक मोहल्ले राम नाराय... Read More...

जो डूबा सो हुआ पार…: आलेख (अनीता मिश्रा)

''क़ैद बन जाए मुहब्बत तो मुहब्बत से निकल'', या ''ज़न्नत एक और हैं, जो मर्द के पहलू में नहीं..'' आमतौर पर लोग प्रेम के मायने बंधना या बांधना समझते हैं। लेकिन एक स्त्री और पुरुष के बीच का प्रेम फैसला लेने की एक आज... Read More...

घंटा बुद्धिजीवी : व्यंग्य (अनीता मिश्रा )

"अगर कोई स्त्री इन्हें गलती से भी पोजिटिव रिस्पोंस दे देती है तो इनके मन में मंदिर की सामूहिक आरती के समय बजने वाले हजारों घंटे बजने लगते हैं . ये उसको समझाते हैं कि नारी मुक्ति का रास्ता देह से होकर जाता है इस... Read More...

सोशल मीडिया के ‘जीजा जी’: व्यंग्य (अनीता मिश्रा)

"इन जीजाओं की किस्मत उस वक़्त खुल जाती है जब इन्हें कोई इनके जैसी मजेदार साली मिल जाती है. मसलन जीजा ने लिखा ‘बहुत शनदार’ तो साली साहिबा एक आँख बंद वाली इमोजी बनाते हुए लिखेंगी ..’क्या ? मैं या मेरी ड्रेस’ बस फि... Read More...

ड्रामा क्वीन: कहानी (अनीता मिश्रा) kahani in hindi

"सरिता ने हाथ की रस्सी को झटक कर फेंका और घूरकर लखन को देखने लगी। वह इतनी कसकर हिचकी लेकर रो रही थी कि उससे कुछ बोला नहीं जा रहा था। सास ने लानत भरी आवाज में कहा, ‘’दुल्हिन ! तुम दुई कौड़ी की निकली। अरे, धीरे –ध... Read More...

पोखर से नदी बनने की यात्रा है …..’पार्च्ड’: (अनीता मिश्रा)

मेरे पीछे बैठे दो लड़कों में से किसी की आवाज आयी ‘बहुत सही’ । शायद उसके हिसाब जो औरत जो पति की मार का विरोध कर रही है मार खाने लायक है । परदे पर एक सामंती चरित्र का साथ देता वो आदमी जो हाल में मौजूद था ‘बहुत सही... Read More...
मुआवज़ा: कहानी (फरीदा ज़माल)

क्यों अखरती हैं मुखर स्त्रियाँ…: आलेख (अनीता मिश्रा)

“शायद दुनिया में अधिकतर जगह ऐसा है कि ज्यादा तर्क – वितर्क करती स्त्री को उस तरह से सम्मान नहीं मिल पाता है जिस तरह पुरुष को मिलता है । ऐसा करने वाला पुरुष जहाँ सबकी नज़रों में महान बन जाता है ,बुद्धिमान समझा जा... Read More...