बाज़ार और साम्प्रदायिकता… कविता (अनवर सुहैल)

सार्थक, समर्थ और सामाजिक भाव-बोध पैदा करती 'अनवर सुहैल' की दो कवितायें .....|  बाज़ार और साम्प्रदायिकता...  बाज़ार रहें आबाद अनवर सुहैल बढ़ता रहे निवेश इसलिए वे नहीं हो सकते दुश्मन भले से वे रहे हों आत... Read More...

‘पहचान’ पर एक ख़त: (अनवर सुहैल)

'अनवर सुहैल' के उपन्यास "पहचान" पर 'पाखी' ने किन्ही धर्मव्रत चौधरी की समीक्षा छापी थी..जिसमे उपन्यास की विषयवस्तु और लेखक के औचित्य पर सवाल उठाया गया था...उस समीक्षालेख के संदर्भ में "अनवर सुहैल"  की  प्रतिक्रि... Read More...

मेहनतकश के सीने में: कविता (अनवर सुहैल)

आप बीती जो जग में देखी..... कोयला खदान मजदूरों के बहाने दुनिया के मजदूरों की कुंठा, विषमता और बिडम्बना को खुद से गुजारकर शब्द देते कवि, लेखक 'अनवर सुहैल' ........| मेहनतकश के सीने में  कितना कम सो पाते हैं ... Read More...

कुंजड़-कसाई: कहानी (अनवर सुहैल)

अनवर सुहैल कुंजड़-कसाई ‘कुंजड़-कसाइयों को तमीज कहाँ… तमीज का ठेका तो तुम्हारे सैयदों ने जो ले रक्खा है?’ मुहम्मद लतीफ कुरैशी उर्फ एम एल कुरैशी बहुत कम बोला करते। कभी बोलते भी तो कफन फाड़कर बोल... Read More...
“अनवर सुहैल” की तीन ‘लघु कथाएं’

“अनवर सुहैल” की तीन ‘लघु कथाएं’

निशब्द, दंश, छटपटाहट फिर सवाल ….. कोई जबाव नहीं ….. कलम , अभिव्यक्ति …..? अनवर सुहैल फ़र्क़ फुटपाथ पर दोनों की गुमटियां हैं। एक मोची की, दूसरी धोबी की। मोची शूद्र और धोबी मुसलमान। दोनों फुर्सत में अ... Read More...

गौ-हत्या: कहानी (अनवर सुहैल)

अनवर सुहैल जन्म-तिथि : 09 अक्टूबर 1964 जांजगीर (छत्तीसगढ़) प्रकाशित कृतियाँ : उपन्यास पहचान : 2009, कथा संग्रह : कुंजड़ कसाई : 1995, गहरी जड़ें : 2013 कविता : और थोड़ी सी शर्म दे मौला : 2003, संतो... Read More...

शोकपर्व: कहानी (अनवर सुहैल)

आशा -निराशा, कुंठा-अवसाद के बीच जीते-जी अपना शोकपर्व मनाती युवा पीढी के मानसिक एवं आंतरिक अंतर्द्वंद का बेहद रोचक और पठनीय शैली में विश्लेष्ण करती ‘अनवर सुहैल’ की कहानी, जो सहज अंदाज़ में कथित आशाओं से भरे वर्तम... Read More...
शाकिर उर्फ़…… : कहानी (अनवर सुहैल)

शाकिर उर्फ़…… : कहानी (अनवर सुहैल)

‘राजू ने कहा – ”हम खुद अपने गांव में हर साल दुर्गा-पूजा में खुबसूरत ढंग से पंडाल सजाते हैं साब, भले से दाढ़ी-टोपी वाले गुस्सा करते हैं लेकिन कितना अच्छा लगता है कि लोग कितनी श्रद्धा से पूजा करते हैं और ... Read More...