कब्र का अजाब : लघु कथा (आरिफा एविस)

अब अम्मी जोया को क्या समझाती कि एक ख़ास उम्र के बाद लड़कियों में जिस्मानी बदलाव होता है जिसकी वजह से लड़कियां मस्जिद-मदरसों में नहीं जाया करतीं. औरतें तो वैसे भी नापाक होती हैं. और नापाक चीज खुदा को भी पसंद नहीं. ... Read More...

पुल गिरा है कोई पहाड़ नहीं : व्यंग्य (आरिफा एविस)

सरकार तो आती जाती है आज ये है कल वो थी. लेकिन देश का विकास कभी नहीं रुकता क्योंकि सरकार और कम्पनी में अच्छा गठजोड़ है. ये तो देश की सेवा या लोगों की सेवा बड़ी मुस्तैदी और ईमानदारी से कर रहे थे. 2 साल के प्रोजेक्ट... Read More...

बेवकूफी का तमाशा : व्यंग्य, आरिफा एविस

'अरे जमूरे ! आजकल के बुद्धिजीवी और लेखक भी तो लोगों का अप्रैल फूल बनाते हैं. ऐसे मुद्दों पर लिखते और ऐसे विषयों पर चर्चा करते हैं जिसका अवाम से कुछ भी लेना देना नहीं होता.लेकिन अपना स्वार्थ सिद्ध जरूर पूरा हो ज... Read More...

बेवकूफी का सौन्दर्य: समीक्षा (आरिफा एविस)

"पूरी वर्णमाला में मेरे और तेरे और 'ञ' के अलावा और कोई स्त्रीलिंग नहीं है. .... क्या पता खूब सारे स्त्रीलिंग शब्द रहे हों लेकिन उनको मिटा दिया गया हो जिस तरह आज लड़कियों की संख्या कम होती जा रही है. क्या पता वर्... Read More...

ईमानदारी का पर्व और वो: व्यंग्य (आरिफा एविस)

बीवी ने समझाया कि तुम काम पर जाओ मैं जाकर लाइन में लग जाऊँगी बच्ची छोटी है तो क्या हुआ? घर में मरीज है तो क्या हुआ ? किसी न किसी को तो बैंक जाना होगा अगर घर का खर्च चलाना है. ईमानदारी का पर्व है पूरा देश मना रह... Read More...

ना काहू से दोस्ती न काहू से बैर: व्यंग्य (आरिफा एविस)

नेताजी: "बिना समर्थन के आपको जल, जंगल और जमीन का पुश्तैनी हक़ कैसे मिल सकता है? जब सीधी ऊँगली से घी नहीं निकलता तो ऊँगली टेढ़ी करनी ही पड़ती है फिर तुम्हें तो घी से मतलब है.आम खाओ गुठलियों को मत गिनों. सरकार आये य... Read More...

शिकार करने का जन्मसिद्ध अधिकार: व्यंग्य (आरिफा एविस)

यह जंगलराज के गर्व की बात है कि जन्मजात राजा ही जंगल पर राज करे. राजा ने ये एलान कर दिया कि वह जन्मजात अधिकारों को कभी भी जंगल से हटने नहीं देगा. जो भी जंगलराज के जन्मजात कानूनों को तोड़ने की कोशिश करेगा दंड का ... Read More...

पानी नहीं है तो क्या हुआ कोक पियो, खेल देखो: व्यंग्य (आरिफा एविस)

"करीब दस राज्यों के साथ महाराष्ट्र के कई जिले सूखा ग्रस्त घोषित कर दिये गए. लेकिन अब लोगों को चिंता करने की जरूरत नहीं, अगर कोई किसान पानी के नाम पर देशभक्ति में बाधा डालने की कोशिश करेगा तो देशभक्ति को बनाये र... Read More...

मई दिवस की संघर्ष गाथा: व्यंग्य (आरिफा एविस)

दिल्ली एन.सी.आर से सटे हुए क्षेत्र पूरी तरह से मजदूर बस्ती के रूप में पहचाने जाते हैं. हर रोज लाखों लोग 5 से 10 हजार रुपये तक की नौकरी करने के लिए दिल्ली,गाजियाबाद, गुडगाँव में साइकिलों पर सवार होकर या रेल में ... Read More...

बहिष्कारी तिरस्कारी व्यापारी : व्यंग्य (आरिफा एविस)

भारत एक त्यौहारों वाला देश है तब ऐसे सीजन में त्यौहारी वक्तव्यों का सीजन न हो ऐसे कैसे हो सकता है? यूँ तो हमें किसी बात से गुरेज नहीं लेकिन कोई अगर हमारे दुश्मन की तरफदारी करेगा तो उसका बहिष्कार करना जरूरी है. ... Read More...