कविता में मानसिक अपंगता का अंत है-लोकराग: समीक्षा

कविता में मानसिक अपंगता का अंत है-लोकराग  -: श्रीराम तिवारी :- जीवन के अंत में ही मुक्तिबोध का एक ढ़ीला-ढ़ाला कविता-संग्रह आया। उनकी एक कविता को पाठ्यक्रम से हटाया गया। मेरे खुद का एकांकी एकत्र संग्रह 78वें वर्... Read More...

चुप रहना कविता का धर्मः डॉ0 रामवचन राय

 साहित्यिक गतिविधियों के अंतर्गत पटना से 'प्रभात सरसिज' के काव्य संग्रह ‘लोकराग‘ के लोकार्पण पर 'अरुण नारायण' की रिपोर्ट ......| चुप रहना कविता का धर्मः डॉ0 रामवचन राय  अरुण नारायण 'प्रभात सरसिज' के काव्य... Read More...

इंडिया कॉफी हाउस का गुजरा हुआ जमाना: संस्मरण

पटना के ‘इंडिया कॉफी हाउस’ के बंद हुए अभी मात्र तीन वर्ष ही बीते हैं। पर उसकी याद ऐसे आती है जैसे कि वह कोई गुजरे हुए जमाने की सु-सुखद स्मृति हो।-  सूर्यनारायण चौधरी (सूर्यनारायण चौधरी को उनके जन्म द... Read More...