काला – हीरा: कविता (अशोक कुमार)

कोल इंडिया में कार्यरत 'अशोक कुमार' की कविताएँ कोयले की कालिख के भीतर से झांकती धवल जीवन की लालसाएं एवं इंसानी जिजीविसा की ज़िंदा तस्वीरें हैं .......| - संपादक  काला - हीरा ( बचपन में )   अशोक कुमार कोय... Read More...

ओह दाना मांझी तुम भी न, एवं अन्य कवितायें (अशोक कुमार)

कम शब्दों में बड़ी बात कहने का सामर्थ्य रखती है कविता | जैसे मिर्ची का एक बीज जो झनझना सकता है दिमाग तक | शब्दों की घनी बुनावट के बिना भी जिंदगी के गहरे रंगों कुछ इसी अंदाज़ के साथ उकेरतीं 'अशोक कुमार' की कविताये... Read More...