अहसास : कविता (अशोक तिवारी)

सामाजिक व्यवस्था में शहरों का बढ़ता आकार, लुप्त होते नदियों के किनारे, अंधा-धुंद पेड़ों की कटाई से रूकती सांसों की डोरऔर  गाँव से रोटी की तलाश में शहरों की तरफ दौड़ते  युवाओं के अपनों से बिछड़ते जाने के दर्द की... Read More...

वो औरत : कविता (अशोक तिवारी)

स्त्री जीवन के क्षणिक, स्थाई, सामाजिक, राजनैतिक, पारिवारिक विभिन्न रूप स्वरूप, कुंठा अवसाद प्रेम आलाप के आरोह अवरोह से गुजरते हुए उसके अनेक पहलुओं का रचनात्मक विश्लेष्ण करती अशोक तिवारी की एक लम्बी कविता....| -... Read More...

अंधी गली का मुहाना : कविता (अशोक तिवारी)

भारतीय समाज के संघर्ष शील अतीत को सामने रखकर हमारे आज से सवाल करती 'अशोक तिवारी' की कविता ....... अंधी गली का मुहाना अशोक कुमार तिवारी ये कौन सी गली में आ गए हम कौन सी वादियों में घिर गए कि कुछ सुझाई नह... Read More...

वो हाथ…एवं अन्य कविताएँ (अशोक तिवारी)

इंसान होने के एहसासात के साथ संवेदनाओं को छूती हुई अशोक तिवारी  कविताएँ ......... संपादक  वो हाथ... अशोक कुमार तिवारी काम करते वो हाथ जो हों किसी भी देश में किसी भी मिट्टी से जुड़े हों उनके सरोकार जो र... Read More...

पतंग पर सवार : रेखाचित्र (अशोक कुमार तिवारी)

हमेशा ही सामान्य या सहिष्णु दिखने वाली स्थितियां प्राकृतिक रूप से सामान्य नहीं होतीं अपितु किसी अनचाहे डर और कथित अनुसाशन भी उनके यथार्थ या असामान्य, असहिष्णुता जैसी स्थितियों को किसी आवरण की तरह ढांके रहता है ... Read More...