अंधी गली का मुहाना : कविता (अशोक तिवारी)

भारतीय समाज के संघर्ष शील अतीत को सामने रखकर हमारे आज से सवाल करती 'अशोक तिवारी' की कविता ....... अंधी गली का मुहाना अशोक कुमार तिवारी ये कौन सी गली में आ गए हम कौन सी वादियों में घिर गए कि कुछ सुझाई नह... Read More...

वो हाथ…एवं अन्य कविताएँ (अशोक तिवारी)

इंसान होने के एहसासात के साथ संवेदनाओं को छूती हुई अशोक तिवारी  कविताएँ ......... संपादक  वो हाथ... अशोक कुमार तिवारी काम करते वो हाथ जो हों किसी भी देश में किसी भी मिट्टी से जुड़े हों उनके सरोकार जो र... Read More...

पतंग पर सवार : रेखाचित्र (अशोक कुमार तिवारी)

हमेशा ही सामान्य या सहिष्णु दिखने वाली स्थितियां प्राकृतिक रूप से सामान्य नहीं होतीं अपितु किसी अनचाहे डर और कथित अनुसाशन भी उनके यथार्थ या असामान्य, असहिष्णुता जैसी स्थितियों को किसी आवरण की तरह ढांके रहता है ... Read More...