मरना कोई हार नहीं होती: संस्मरण (हरिशंकर परसाई) -: परसाई द्वारा मुक्तिबोध पर लिखा गया संस्मरण :-

अली मंजिल: कहानी (अवधेश प्रीत)

‘अली मंजिल’ अवधेश प्रीत की हमरंग पर प्रकाशित होने वाली दूसरी और बहु चर्चित कहानी है|  कहानी अली मंजिल बिना किसी शोर के बिना किसी प्रत्यक्ष मानवीय त्रासद घटना के एक दम मौन रूप में भी न केवल मानवीय संवेदनाओ... Read More...

एक मामूली आदमी का इंटरव्यू

    एक मामूली आदमी का इंटरव्यू  अवधेश प्रीत वह एक मामूली आदमी थे। उतने ही मामूली, जितना कि कोई दो-चार बार भी देखे तो, उसमें ऐसा कुछ नजर नहीं आये, जिसके जरिए उसे याद रखा जा सके। रहन-सहन ही ... Read More...
अम्मी…: कहानी (अवधेश प्रीत)

अम्मी…: कहानी (अवधेश प्रीत)

“माँ” यकीनन “माँ” होती है हिन्दू या मुसलमान नहीं | यह बिडम्बना ही है कि वर्तमान अवसरवादी राजनीति और उसके प्रभाव से प्रभावित समाज द्वारा गढ़ी गई अवधारणाओं ने इंसान को इंसान के प्रति इतना शंकालू बना दिया है ... Read More...

फलितार्थ: कहानी (अवधेश प्रीत)

कथाकार ‘अवधेश प्रीत’ मानवीय जिंदगियों के साथ इंसानी जिजीविषा के संघर्षों से उत्पन्न छोटी से छोटी घटनाओं को ऐसे सहेजते हैं जैसे समय की गुल्लक मानवीय इतिहास समेत रही हो | कहानी के सहज कहन में इंसानी संघर्षो... Read More...