‘दीबा नियाज़ी’ की कविताएँ॰॰॰

अतृप्त मानवीय इच्छाओं के ऊपर बेहतर ज़िंदगी का भ्रमित आवरण बुनते सुकोमल सपने दिखा कर, इंसानी जज़्बातों से खेलते हुए उन्हें अपने क़ब्ज़े में कर, इस्तेमाल की वस्तु बना लेने की सरल प्रक्रिया का, वर्तमान तकनीकी समय ... Read More...