परास्त: कहानी (धनंजय सिंह)

‘नहीं...नहीं साब। हम हाथ जोड़ता। हमको नई जाना। फिफ्टीन इयर में नायक का रैंक मिला है। एक बार सिक क्वार्टर चला गया तो रैंक चला जाएगा।’ डी.एस.सी. के मरीज गार्ड ने अपनी यूनीफॉर्म की कमीज में हाल ही में लगे नायक के र... Read More...