अब और नहीं: कहानी (फिरोज अख्तर)

चांद आज बहुत सुस्त लग रहा था। किसी की गोद में नहीं जा रहा था। आज ज्यादा ही छिरिया रहा था। मां की छाती से लगकर थोड़ी देर के लिए चुप हो जाता फिर रोने लगता। शाम होते ही उसका बदन गर्म होने लगा। रात में तबियत बिगड़ने ... Read More...
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गोपाल: कहानी (फ़िरोज अख्तर)

मानवीय चरित्र और उसकी संवेदनशीलता को एक पल के लिए झकझोर देने के साहस के साथ बेहद लघु आकार के बावजूद कितने बड़े और और अनसुलझे सवालों से मुठभेड़ के लिए विवश करती 'फ़िरोज अख्तर' की लघुकथा ..... | - संपादक  गोपाल  ... Read More...