जिनकी दुआ को तरसे जमाना, उन्हें भी दुआ नसीब हो : समीक्षा लेख (पद्मा शर्मा)

जीवन जीने के लिए शरीर के समस्त अंग और अवयव अपनी-अपनी अहमियत रखते हैं। शरीर का कोई भी अंग यदि अपूर्ण है तो जीवन की दौड़ में कई बाधाएँ उपस्थित हो जाती हैं। समाज की विवाह संस्था की मूल धुरी पर आधारित जिन शारीरिक अव... Read More...

मेरा मूल नाम कुछ और है…: ‘सलोनी किन्नर’ साक्षात्कार

"हर व्यक्ति की तरह है हम किन्नरों के भी अपने नियम बनाएं हुए है और उनका पालन करना पड़ता है। जैसे रोजमर्रा का काम, नहाना-धोना, पूजा -पाठ करना, मंदिर जाना आदि काम प्रमुख है । पर एक दर्द-सा दिल में हमेशा रहता है कि... Read More...

हाँ मैं किन्नर हूँ, ‘मनीषा महंत’ (थर्ड जेंडर) साक्षात्कार

15 अप्रैल 2014 को माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा किन्नरों को थर्ड जेंडर घोषित किए जाने के ऐतिहासिक फैसले के बाद इस समुदाय के प्रति समाज में सथापित कथित धारणाएं फिर से चर्चा के केंद्र में आई और पूर्व सथापित मान्य... Read More...