आवाज दे कहां है…!: कहानी (गीताश्री)

वह अपने डर को काबू में रखने की कोशिश करती पर किशोर मन में जो डर की नींव पड़ी थी, उस पर इतनी बड़ी इमारत बन चुकी थी कि वह चाह कर भी उसे गिरा नहीं सकती थी. उसे गिराने के लिए साहस की सुनामी चाहिए थी, जो हो नहीं सकती ... Read More...

हिमखंड के बाशिंदे: कहानी (गीताश्री)

सामाजिक, राजनैतिक बदलावों के साथ उद्घाटित होते वर्तमान के ताने बाने में उलझी इंसानी जिंदगी, मानो मकड़ी के जाले में फंसी हुई मक्खी | सतही तौर पर हँसते, गाते, मुस्कराते चेहरे जरूर हैं किन्तु मानव मन का सच क्या यही... Read More...