article placeholder

चरित्रहीन : कहानी

आज भी जिस समाज में पुरषों का इधर उधर मुहँ मारना उनकी पुरुषीय काबलियत माना जाता है और औरत के इंसान होने के हक़ की बात करना भी उसके चरित्रहीन होने का प्रमाण घोषित हो जाता हो उस समाज में औरत की अस्मिता से जुड़... Read More...

मैं भी आती हूं ….! : कहानी (हनीफ मदार)

वर्तमान समय की  उपभोगातावादी व्यवस्था के कारण  हरी भरी भूमि और  पेड़ों को काटकर ईट पत्थर की चन्द दीवारों द्वारा बने मकानों के दर्द को बयाँ करती है  हनीफ मदार की कहानी  ‘ मैं भी आती हूँ ….. ‘ जिसमें धर्म ... Read More...
रसीद नं0 ग्यारह: कहानी (हनीफ मदार)

रसीद नं0 ग्यारह: कहानी (हनीफ मदार)

समय के बदलाव के साथ कदमताल करते हुए चलने एवं बेहतर जीवन यापन के लिए बेहतर शिक्षा व्यवस्था की जरूरत को समझने समझाने के भ्रम जाल के बीच, समय के साथ मुस्लिम समाज में भी पुरानी बंदिशें टूटने लगीं हैं| जलसे आद... Read More...
रोज़ा…: कहानी (हनीफ मदार)

रोज़ा…: कहानी (हनीफ मदार)

समाज में फ़ैली धार्मिक कट्टरता व् आडम्बरों पर तीखा प्रहार करती और ठहर कर पुनः सोचने को विवश करती, “हनीफ मदार” की   छोटी एवं बेहद मार्मिक कहानी ……| – अनीता चौधरी  हनीफ मदार रोज़ा… पाक रमजान म... Read More...
जश्न-ए-आज़ादी : कहानी (हनीफ मदार)

जश्न-ए-आज़ादी : कहानी (हनीफ मदार)

‘हनीफ मदार’ की छोटी किन्तु बेहद मार्मिक और संवेदनशील कहानी ‘जश्न-ए-आज़ादी’ हाल ही में आउटलुक हिंदी के जनवरी २०१६ के अंक में प्रकाशित हुई जिसे देश भर के पाठकों की बेहद सराहना मिली | इस कहानी पर पाठकों के अन... Read More...
चरित्रहीन : कहानी (हनीफ मदार )

अनुप्राणित : कहानी (हनीफ मदार)

प्रेम एक खूबसूरत इंसानीय व मानवीय जीवन्तता का एहसास है  जो किसी भी जाति, धर्म, सम्प्रदाय से बढ़कर होता है जिस पर किसी भी तरह की बंदिशे नहीं लगाई जा सकती क्योंकि  बिना प्रेम के मानव जीवन संभव नहीं होता | प्... Read More...