ब-यादे रोहित वेमुला: स्मरण आलेख (जीवेश प्रभाकर)

"जाने कब समाज को बदल डालने की तमन्ना लिए एक युवा अचानक मानो हमारे मुंह पर थूकता हुआ दूसरे जहाँ को चला जाता है । मानो कह रहा हो कि तुम्हारी है तुम ही संभालो ये दुनिया । मगर हम हैं कि शर्म भी आती नहीं । आज राष्ट्... Read More...