एक मोर्चा एवं अन्य कवितायें : जिजीविषा रजनी

शब्द और संवेदनाओं के सम्मलित एहसास से गुथी जिजीविषा रजनी की कविताएँ सहज ही मानवीय अन्तःकरण में इंसानी उद्वेग को झकझोरती सी प्रतीत होती हैं | जैसे खड़े हैं कुछ सवाल खुद जवाब बनकर .....| - संपादक  एक मोर्चा ज... Read More...

स्मार्ट सिटी: एवं अन्य कविता (जिजीविषा)

चैनल, टी आर पी, विज्ञापन, शोशल मीडिया, इंटरनेट, बाज़ार और चकाचौंध से बनते स्मार्ट सिटी की आबो-हवा को साँसों से अपने अन्दर खींचते हुए यह याद रख पाना कि, यह सब कितने ही मजबूर और वेवश इंसानों की जान की कीमत पर हासि... Read More...